JSW और Volkswagen की बड़ी डील: भारत में 51:49 के जॉइंट वेंचर का ऐलान, लेकिन फंसी है **₹20,000 करोड़** की अड़चन

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AuthorMehul Desai|Published at:
JSW और Volkswagen की बड़ी डील: भारत में 51:49 के जॉइंट वेंचर का ऐलान, लेकिन फंसी है **₹20,000 करोड़** की अड़चन

JSW Group और Volkswagen Group ने भारत में एक जॉइंट वेंचर बनाने के लिए नॉन-बाइंडिंग करार किया है, जिसमें JSW की हिस्सेदारी **51%** होगी। हालांकि, यह डील **₹20,000 करोड़** के कस्टम टैक्स विवाद के कारण चर्चा में है, जो इसके वैल्यूएशन के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

ऑटो सेक्टर में नया गठबंधन

JSW Group और Volkswagen Group ने भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में एक बड़े बदलाव की ओर कदम बढ़ाए हैं। दोनों कंपनियों ने एक नॉन-बाइंडिंग मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर साइन किए हैं, जिसके तहत 51:49 के अनुपात में एक जॉइंट वेंचर बनेगा। यह पार्टनरशिप मुख्य रूप से Skoda Auto Volkswagen India के ऑपरेशंस पर केंद्रित होगी। इस वेंचर में 51% कंट्रोल JSW के हाथ में होगा, जो इसे कंपनी की दिशा तय करने की शक्ति देगा। ध्यान रहे कि यह नया वेंचर JSW और SAIC Motor की मौजूदा पार्टनरशिप (MG brand) से पूरी तरह अलग होगा। दोनों कंपनियों का लक्ष्य साल 2026 के अंत तक एक फाइनल और बाइंडिंग एग्रीमेंट पर पहुंचना है।

₹20,000 करोड़ का टैक्स विवाद

डील की राह में सबसे बड़ी बाधा भारतीय कस्टम विभाग का एक पुराना केस है। विभाग ने आरोप लगाया है कि Volkswagen ने पहले गाड़ियों के कलपुर्जे कम ड्यूटी चुकाने के लिए गलत तरीके से इंपोर्ट किए थे। इस विवादित दावे की राशि लगभग ₹20,000 करोड़ है। फिलहाल वैल्यूएशन पर बातचीत के दौरान यह लायबिलिटी सबसे बड़ा मुद्दा है, और खबरों के अनुसार JSW इस टैक्स बोझ को अपने सिर लेने के लिए तैयार नहीं है। इस मुद्दे को कैसे सुलझाया जाएगा, इसी पर डील का अंतिम स्वरूप निर्भर करेगा। Volkswagen दिसंबर तक अपने बोर्ड के सामने एक कंक्रीट प्रपोजल रखने की तैयारी में है।

क्या है स्ट्रैटेजिक लक्ष्य?

Volkswagen का भारत में मार्केट शेयर अभी केवल 2.5% के आसपास है। कंपनी की चाकन और छत्रपति संभाजीनगर की फैसिलिटीज की कुल क्षमता 400,000 यूनिट्स सालाना है, जबकि सेल्स महज 100,000 यूनिट्स के करीब है। इस वेंचर के जरिए दोनों कंपनियां 'India Main Platform' पर आधारित इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) के उत्पादन और मार्केट शेयर बढ़ाने पर फोकस करेंगी। निवेशकों की नजरें अब टैक्स विवाद के निपटारे और वैल्यूएशन पर टिकी हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.