JSW Motors के CEO रंजन नायक ने आगामी CAFE-3 फ्यूल एफिशिएंसी नियमों का स्वागत किया है। कंपनी इन नियमों को अपनी लॉन्ग-टर्म मल्टी-पावरट्रेन स्ट्रैटेजी का आधार बना रही है, जिससे उन्हें 2027 से अपनी मैन्युफैक्चरिंग योजनाओं को सही दिशा देने में मदद मिलेगी।
नियम क्यों हैं अहम?
सरकार द्वारा लाए गए CAFE-3 नियम 1 अप्रैल, 2027 से 31 मार्च, 2032 तक लागू रहेंगे। JSW Motors के लिए यह नीति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल प्योर बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स तक सीमित नहीं है, बल्कि हाइब्रिड टेक्नोलॉजी को भी तवज्जो देती है। नए फ्रेमवर्क में 3.0 का डेरोगेशन फैक्टर बैटरी और रेंज-एक्सटेंडेड इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के लिए, और 2.5 का फैक्टर प्लग-इन हाइब्रिड और स्ट्रांग हाइब्रिड के लिए तय किया गया है। यह मल्टीप्लायर कंपनियों को अपने उत्सर्जन लक्ष्य हासिल करने में बड़ी राहत देगा।
मल्टी-पावरट्रेन और मार्केट की चुनौतियां
भारत में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी को देखते हुए, JSW Motors केवल इलेक्ट्रिक कारों पर निर्भर रहने के बजाय रेंज-एक्सटेंडेड और प्लग-इन हाइब्रिड मॉडल पर काम कर रही है। कंपनी महाराष्ट्र में अपना मैन्युफैक्चरिंग बेस तैयार कर रही है। ध्यान रहे कि यह कंपनी JSW MG Motor India या JSW Holdings से अलग एक स्वतंत्र इकाई है।
एग्जीक्यूशन रिस्क पर नजर
हालांकि नए नियम एक स्पष्ट रोडमैप देते हैं, लेकिन ऑटो सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बहुत कड़ी है। पुरानी कंपनियों के पास पहले से मजबूत सप्लाई चेन है। JSW Motors के सामने सबसे बड़ी चुनौती बैटरी और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स के लोकलाइजेशन की है ताकि लागत को प्रतिस्पर्धी रखा जा सके। निवेश के लिहाज से, कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट और प्रोडक्ट रोडमैप पर नजर रखना जरूरी होगा।
