JSW MG Motor India ने FY26 में अपने कुल कंपोनेंट्स का **70%** हिस्सा चीनी पार्टनर SAIC Motor से मंगवाया है, जिसकी वैल्यू **$840 मिलियन** है। कंपनी की सेल्स में **17%** की ग्रोथ और रेवेन्यू **₹12,075 करोड़** होने के बावजूद, आयात पर इतनी ज्यादा निर्भरता एक बड़ा ऑपरेशनल रिस्क बनी हुई है।
चीन पर निर्भरता और चुनौतियां
कंपनी के फाइनेंशियल ईयर 2026 के आंकड़ों ने सप्लाई चेन के मोर्चे पर बड़ा खुलासा किया है। जॉइंट वेंचर ने अपनी चीनी पार्टनर SAIC Motor से जुड़ी कंपनियों के साथ लगभग $840 मिलियन के ट्रांजेक्शन किए। इसमें $820 मिलियन केवल कंपोनेंट्स की खरीद है, जबकि $20 मिलियन रॉयल्टी और लाइसेंसिंग फीस के तौर पर दिए गए। कुल प्रोक्योरमेंट $1.16 बिलियन तक पहुंच गया है, जो साफ करता है कि कंपनी का मैन्युफैक्चरिंग बेस अभी भी काफी हद तक चीन पर टिका है।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस में दम
सप्लाई चेन की बाधाओं के बावजूद कंपनी का प्रदर्शन मजबूत रहा है। FY26 में कंपनी ने 72,918 गाड़ियां बेचीं, जो पिछले साल के मुकाबले 17% ज्यादा हैं। वहीं, कंपनी का रेवेन्यू 40% बढ़कर ₹12,075 करोड़ पर पहुंच गया है, जो भारतीय बाजार में MG की गाड़ियों की जबरदस्त डिमांड को दर्शाता है। हालांकि, केवल एक पार्टनर पर निर्भर रहने से ऑपरेशनल स्वायत्तता (autonomy) और जियोपॉलिटिकल रिस्क जैसे मुद्दे बने हुए हैं, जिन पर रेगुलेटर्स की नजरें टिकी हैं।
घरेलू विस्तार की राह
इस निर्भरता को कम करने के लिए कंपनी ने आने वाले सालों में ₹3,000 करोड़ से ₹4,000 करोड़ के निवेश का ऐलान किया है। यह फंड मुख्य रूप से हलोल (Halol) प्लांट की क्षमता बढ़ाने के लिए है, ताकि भारत में ही पार्ट्स का निर्माण हो सके। हालांकि, ऑटोमोटिव सप्लाई चेन को लोकल लेवल पर शिफ्ट करना एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें समय और लागत दोनों बढ़ सकते हैं।
गवर्नेंस में बदलाव और भविष्य की रणनीति
कंपनी के मैनेजमेंट में भी बदलाव दिख रहे हैं। पार्थ जिंदल अब चेयरमैन हैं, वहीं SAIC के दिग्गज Ji Qiwei को 2025 की शुरुआत में प्रेसिडेंट बनाया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी अपनी निर्भरता घटाने के लिए Volkswagen Group जैसे ग्लोबल ऑटोमेकर्स के साथ पार्टनरशिप करने पर भी विचार कर रही है। निवेशकों के लिए अब देखने वाली बात यह होगी कि हलोल प्लांट का एक्सपेंशन और स्वदेशीकरण की रफ्तार कितनी तेज रहती है।
