JSW Group ने PM-eBus Sewa स्कीम के तहत **1,200** इलेक्ट्रिक बसों का टेंडर अपने नाम कर लिया है। दिग्गज कंपनियों को पछाड़कर किए गए इस आक्रामक प्रवेश से कमर्शियल व्हीकल मार्केट में मुकाबला तेज हो गया है।
सरकारी टेंडर में 1,200 इलेक्ट्रिक बसों का कॉन्ट्रैक्ट जीतकर JSW Group ने कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में धमाकेदार एंट्री ली है। यह जीत सरकार के कुल 4,054 बसों के टेंडर का हिस्सा है, जो Tata Motors और Ashok Leyland जैसी दिग्गज कंपनियों के दबदबे को सीधी चुनौती दे रही है।
प्राइसिंग वॉर या बेहतर रणनीति?
नतीजे बताते हैं कि JSW की बिडिंग बाकी कंपनियों से करीब 10% कम थी। जहां Tata Motors जैसी कंपनियां प्रॉफिटेबिलिटी बनाए रखने के लिए प्राइस वॉर से दूर रहना चाहती हैं, वहीं JSW ने मार्केट शेयर हासिल करने के लिए आक्रामक रुख अपनाया है।
'Ampstar' और बड़ा निवेश
JSW Greentech ने अपना कमर्शियल EV ब्रांड 'Ampstar' लॉन्च किया है। कंपनी ने छत्रपति संभाजी नगर में ₹2,500 करोड़ के निवेश से मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाया है, जिसकी क्षमता 15,000 यूनिट सालाना है। JSW सिर्फ बसें नहीं बेच रही, बल्कि 'Gross Cost Contract' (GCC) मॉडल के जरिए बसों को खुद ऑपरेट और मेंटेन भी करेगी। इसमें कंपनी की कमाई तय किलोमीटर पर आधारित होगी, लेकिन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉन्ग-टर्म मेंटेनेंस का जोखिम भी कंपनी पर ही होगा।
बदलता बाजार और चुनौतियां
पिछले एक साल में PMI Electro Mobility और Eka Mobility जैसे नए खिलाड़ियों ने करीब 20,000 इलेक्ट्रिक बसों के टेंडर में बड़ा हिस्सा हथियाया है। PM E-DRIVE और PM-eBus Sewa स्कीम की वजह से डिमांड तो है, लेकिन बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने मार्जिन पर दबाव डालना शुरू कर दिया है। निवेशकों के लिए कंपनी की ऑपरेशनल एफिशिएंसी और ऑर्डर्स को समय पर पूरा करना ही भविष्य का असली पैमाना होगा।
