इलेक्ट्रिक ट्रकों की महंगी कीमत की चुनौती को देखते हुए JSW Group ने अपना फाइनेंसिंग आर्म लॉन्च कर दिया है। SBI और ICICI जैसे बड़े बैंकों के साथ मिलकर कंपनी डीजल और इलेक्ट्रिक ट्रकों के बीच के बड़े प्राइस गैप को पाटने की तैयारी में है।
भारी-भरकम कीमत पर लगाम लगाने की कोशिश
इलेक्ट्रिक ट्रकों की सबसे बड़ी बाधा उनकी ऊंची शुरुआती लागत है। फिलहाल, एक हैवी-ड्यूटी इलेक्ट्रिक ट्रक की कीमत लगभग ₹88 लाख तक पहुंच जाती है, जबकि इसके मुकाबले डीजल ट्रक केवल ₹25 लाख में मिल जाते हैं। JSW Group का लक्ष्य 'टोटल कॉस्ट ऑफ ओनरशिप' पर ध्यान देकर इस अंतर को कम करना है। कंपनी का अनुमान है कि इलेक्ट्रिक ट्रक चलाने का खर्च डीजल वाहनों की तुलना में 15 से 20% तक कम होगा।
बैंकों का मिला मजबूत सपोर्ट
इस पहल को सफल बनाने के लिए कंपनी ने State Bank of India (SBI), ICICI Bank, HDFC Bank और Canara Bank के साथ हाथ मिलाया है। ये बैंक कंपनी के इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए 80:20 के अनुपात में फाइनेंस उपलब्ध कराएंगे, जो मौजूदा कमर्शियल वाहन नॉर्म्स के अनुरूप है।
'कैप्टिव डिमांड' का दांव
JSW के पास स्टील, सीमेंट और पोर्ट्स के बिजनेस में 17,000 ट्रकों का विशाल नेटवर्क है। कंपनी अपनी इलेक्ट्रिक यूनिट 'Greentech' के ट्रकों को पहले अपने ही इकोसिस्टम में उतारेगी। मैनेजमेंट का मानना है कि 3,000 से 4,000 यूनिट्स की बिक्री के साथ ही कंपनी ब्रेक-ईवन तक पहुंच जाएगी, जबकि इसकी कुल क्षमता 15,000 यूनिट सालाना है।
नई टेक्नोलॉजी और भविष्य की चुनौतियां
बैटरी की लागत को कम करने के लिए JSW 'बैटरी-एज-ए-सर्विस' और 'बैटरी-स्वैपिंग' जैसे मॉडल लेकर आई है। पहले 100 ट्रकों पर बैटरी-स्वैपिंग का प्रयोग किया जाएगा, जो 500 किलोमीटर तक की रेंज देने में सक्षम होगा। हालांकि, Tata Motors और VE Commercial Vehicles जैसे स्थापित दिग्गजों से मुकाबला करने के लिए कंपनी को अपने इकोसिस्टम से बाहर निकलकर चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉन्ग-टर्म रिलायबिलिटी साबित करनी होगी।
