JLR ने ट्रेड डील का फायदा उठाते हुए इम्पोर्टेड कारों के दाम घटाए
Jaguar Land Rover India ने 20 अप्रैल के बाद से चुनिंदा ब्रिटेन में बनी इम्पोर्टेड (Imported) गाड़ियों की कीमतों में कटौती का फैसला किया है। इस नई इंडिया-यूके ट्रेड डील का फायदा उठाते हुए, कंपनी अपने लग्जरी मॉडल्स को 13% से 15% तक सस्ता कर रही है।
मौजूदा समय में इन गाड़ियों पर 110% तक की इम्पोर्ट ड्यूटी लगती थी, जो अब ट्रेड डील के तहत पहले साल में योग्य कारों के लिए घटकर 30% हो जाएगी। अगले पांच सालों में यह ड्यूटी घटकर 10% तक आ सकती है।
इस भारी छूट से ग्राहकों को ₹40 लाख से ₹70 लाख तक की बचत हो सकती है। रेंज रोवर एसवी 4.4 (Range Rover SV 4.4) जैसी टॉप-एंड मॉडल्स पर ₹75 लाख तक की बचत संभव है, जबकि रेंज रोवर स्पोर्ट एसवी (Range Rover Sport SV) करीब ₹40 लाख सस्ती हो सकती है। JLR एक नया रेंज रोवर स्पोर्ट एसवी वेरिएंट भी लॉन्च कर रही है, जिसकी कीमत करीब ₹2.05 करोड़ रखी गई है।
कोटा और कमजोर रुपया बन रहे बचत में रोड़ा
हालांकि, इस ट्रेड डील से होने वाले फायदे कुछ सीमाओं में बंधे हैं। कम इम्पोर्ट ड्यूटी का लाभ सालाना 20,000 व्हीकल्स के कोटा तक ही सीमित है, जो पांचवें साल तक बढ़कर 37,000 हो जाएगा।
इस कोटा से ज्यादा इम्पोर्ट होने वाली गाड़ियों पर 95% तक की भारी ड्यूटी लग सकती है, जिससे सारी बचत खत्म हो जाएगी।
इसके अलावा, भारतीय रुपये का ब्रिटिश पाउंड के मुकाबले कमजोर होना भी इस डील के असर को कम कर रहा है। फाइनेंशियल ईयर 26 की शुरुआत से अब तक रुपया लगभग 13% कमजोर हुआ है। आगे भी रुपये में अस्थिरता बने रहने की आशंका है, जो इम्पोर्टेड कारें और पार्ट्स की लागत को बढ़ाएगा और ड्यूटी बचत के असर को कुछ हद तक बेअसर कर देगा।
JLR की इस डील से राइवल्स पर बढ़त
यह कीमत समायोजन (Price Adjustment) JLR को अपने प्रतिद्वंद्वियों पर एक बड़ा बढ़त देता है। Mercedes-Benz, BMW और Audi जैसे प्रतिद्वंद्वी ब्रांड्स को इसी तरह की टैरिफ कटौती के लिए व्यापक इंडिया-ईयू ट्रेड डील का इंतजार करना पड़ रहा है, जिसके FY2027-28 तक आने की उम्मीद है। JLR की यूके इम्पोर्ट्स को तुरंत फायदा मिल रहा है।
खुद JLR इंडिया ने पिछले फाइनेंशियल ईयर 25 में 40% की जबरदस्त सेल्स ग्रोथ दर्ज की है, जो 6,183 यूनिट्स तक पहुंची। इसमें डिफेंडर (Defender) और लोकली असेंबल (Locally Assembled) रेंज रोवर्स जैसे मॉडल्स का बड़ा योगदान रहा।
यह ध्यान देने वाली बात है कि ये नई कीमतें लोकली असेंबल मॉडल्स या स्लोवाकिया में बने लैंड रोवर डिफेंडर पर लागू नहीं होंगी। भारतीय लग्जरी कार मार्केट में, जो ज्यादातर ICE-ड्रिवन है, 2025 में SUVs की बिक्री 47.43% रही, हालांकि सेगमेंट की ओवरऑल ग्रोथ धीमी होकर 1.6% रह गई।
JLR की प्राइसिंग स्ट्रेटेजी के जोखिम
हालांकि, JLR इंडिया की इस नई प्राइसिंग स्ट्रेटेजी के लिए कुछ जोखिम और चुनौतियां बनी हुई हैं। सबसे बड़ी बाधा सालाना इम्पोर्ट कोटा ही है। 20,000 व्हीकल्स से शुरू होकर पांचवें साल तक 37,000 तक पहुंचने वाला यह वॉल्यूम, JLR के पॉपुलर मॉडल्स की डिमांड को पूरा करने के लिए शायद काफी न हो, खासकर जब कंपनी की सेल्स में इतनी मजबूत ग्रोथ देखी गई है और यह फाइनेंशियल ईयर 25 में भारत का तीसरा सबसे बड़ा लग्जरी ब्रांड रहा है।
अगर डिमांड इस कोटा से ज्यादा हो जाती है, तो उस पर 95% तक की भारी ड्यूटी लगेगी, जिससे कीमतों का यह फायदा खत्म हो जाएगा। कमजोर होता रुपया भी एक और दबाव है, जो कम ड्यूटी से होने वाली बचत को कम कर सकता है।
जहां JLR को तुरंत फायदा मिल रहा है, वहीं Mercedes-Benz और BMW जैसी कंपनियां स्थानीय उत्पादन (Local Production) बढ़ाकर और निवेश करके लंबे समय तक प्रतिस्पर्धी बने रहने की कोशिश कर रही हैं। Mercedes-Benz ने 2025 में 18,026 लग्जरी कारें बेचीं, जबकि BMW ने 17,271 यूनिट्स बेचीं। Audi भी एक प्रमुख प्रतिद्वंद्वी है।
सितंबर 2025 में JLR की पेरेंट कंपनी Tata Motors को प्रभावित करने वाली एक साइबर घटना, संभावित सप्लाई चेन की कमजोरियों का संकेत देती है।