EV Incentive Scheme: भारत की ₹4,150 करोड़ की स्कीम को मिला 'जीरो' रिस्पॉन्स, बड़ी कंपनियों ने नहीं दिखाई दिलचस्पी

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AuthorMehul Desai|Published at:
EV Incentive Scheme: भारत की ₹4,150 करोड़ की स्कीम को मिला 'जीरो' रिस्पॉन्स, बड़ी कंपनियों ने नहीं दिखाई दिलचस्पी

इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा लाई गई बड़ी इंसेंटिव स्कीम बुरी तरह फ्लॉप रही है। अक्टूबर 2025 की डेडलाइन खत्म होने के बावजूद, किसी भी ग्लोबल कंपनी ने इसमें आवेदन नहीं किया है।

स्कीम क्यों रही नाकाम?

मिनिस्ट्री ऑफ हेवी इंडस्ट्रीज द्वारा लॉन्च की गई 'Scheme to Promote Manufacturing of Electric Passenger Cars in India' (SPMEPCI) का मकसद ग्लोबल कंपनियों को भारत में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने के लिए आकर्षित करना था। इसके बदले सरकार कस्टम ड्यूटी में छूट देने वाली थी, लेकिन सरकारी शर्तों की सख्ती ने कंपनियों को दूर रखा।

कड़ी शर्तें बनीं सबसे बड़ी बाधा

इस स्कीम का लाभ उठाने के लिए कंपनियों को कम से कम ₹4,150 करोड़ (करीब $500 मिलियन) का निवेश करना जरूरी था। साथ ही, 25% लोकल सोर्सिंग को 3 साल में बढ़ाकर 50% करने का नियम था। इसके अलावा, चौथे साल तक ₹5,000 करोड़ के रेवेन्यू का टारगेट भी रखा गया था। ग्लोबल ऑटोमेकर्स के लिए इतनी बड़ी पूंजी फंसाना और अपनी मौजूदा सप्लाई चेन को बदलना जोखिम भरा फैसला था।

क्या भारत की EV महत्वाकांक्षाओं को धक्का लगा?

जानकारों का मानना है कि कंपनियां भारत में लग्जरी EV की मांग को लेकर अभी भी आश्वस्त नहीं हैं। इंपोर्ट रूट उनके लिए ज्यादा लचीला विकल्प बना हुआ है। हालांकि, यह पूरी तरह से विफलता नहीं है, क्योंकि सरकार का 'PM E-DRIVE' स्कीम जैसा प्रोग्राम अभी भी जारी है। अब मंत्रालय इस पॉलिसी में बदलाव करने और शर्तों को आसान बनाने पर विचार कर रहा है, ताकि विदेशी निवेशकों की जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा किया जा सके।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.