भारतीय ऑटो फाइनेंस सेक्टर में ज़बरदस्त ग्रोथ देखने को मिल रही है, खासकर यूज्ड-कार (Used Car) लोन में **26.2%** की सालाना बढ़ोतरी हुई है। जहाँ एक तरफ लोग फॉर्मल क्रेडिट की ओर बढ़ रहे हैं और महंगी गाड़ियां खरीद रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यूज्ड-कार और कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में रीपेमेंट (Repayment) का रिस्क भी बढ़ रहा है।
यूज्ड-कार लोन की डिमांड में क्यों आया उछाल?
भारत का व्हीकल फाइनेंस मार्केट (Vehicle Finance Market) आजकल एक बड़े बदलाव से गुज़र रहा है। इसकी मुख्य वजह है यूज्ड-कार लोन की बढ़ती पॉपुलैरिटी। जून 2021 से जून 2026 के बीच, यूज्ड-कार लोन सेगमेंट में 26.2% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़ोतरी हुई है, जो ऑटो फाइनेंस की दूसरी कैटेगरीज़ से कहीं ज़्यादा है। इसका मतलब है कि ज़्यादा से ज़्यादा कस्टमर अब अनौपचारिक तरीकों से उधार लेने के बजाय पुरानी गाड़ियां खरीदने के लिए बैंक या नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFCs) से फॉर्मल लोन ले रहे हैं।
पहली बार लोन लेने वाले और प्रीमियम गाड़ियां
इस ग्रोथ के पीछे एक बड़ा कारण है कि पहली बार लोन लेने वाले ग्राहक अब फॉर्मल क्रेडिट सिस्टम (Formal Credit System) में आ रहे हैं। अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में लिए गए यूज्ड-कार लोन में से लगभग 75% ऐसे ग्राहकों को दिए गए हैं जिन्होंने पहले कभी ऐसा कोई प्रोडक्ट नहीं लिया था। टू-व्हीलर लोन (Two-wheeler Loans) अभी भी इस फाइनेंशियल इंक्लूजन (Financial Inclusion) के लिए एक अहम जरिया बने हुए हैं। इस सेगमेंट में ग्राहकों की संख्या पांच साल पहले के 2.3 करोड़ से बढ़कर जून 2026 तक 3.6 करोड़ हो जाने की उम्मीद है।
इसके साथ ही, लोग अब ज़्यादा महंगी गाड़ियां (Premiumization) भी खरीद रहे हैं। फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में नए ऑटो लोन का औसत टिकट साइज (Average Ticket Size) बढ़कर ₹8.6 लाख हो गया। ₹15 लाख से ज़्यादा के लोन का मार्केट शेयर अब 29.8% हो गया है, जो सिर्फ दो साल पहले 27.6% था। यह दिखाता है कि शहर और कस्बों के ग्राहक अब महंगी गाड़ियों को तरजीह दे रहे हैं।
रिस्क और डिफॉल्ट (Delinquency) के आंकड़े
हालांकि सेक्टर तेज़ी से बढ़ रहा है, लेकिन इसमें कुछ खास तरह के रिस्क भी हैं जिन पर इन्वेस्टर्स (Investors) को नज़र रखनी चाहिए। आंकड़े बताते हैं कि यूज्ड-कार लोन में डिफॉल्ट रेट 3.1% है, जो कि नए कार लोन के 2.1% डिफॉल्ट रेट से ज़्यादा है। सीधे शब्दों में कहें तो, कस्टमर को यूज्ड-कार के लिए लोन चुकाने में नई कारों की तुलना में थोड़ी ज़्यादा मुश्किल हो रही है।
कमर्शियल व्हीकल (Commercial Vehicle) सेगमेंट, जो पिछले पांच सालों में 20.1% की सालाना दर से बढ़ा है, वह भी अपनी चुनौतियों का सामना कर रहा है। इस सेगमेंट में अर्ली-स्टेज डिफॉल्ट रेट 4.1% है। साथ ही, बरोइंग (Borrowing) का लेवल भी बढ़ रहा है। अब 19.9% कमर्शियल व्हीकल बरोअर्स के पास दो या उससे ज़्यादा एक्टिव लोन हैं, जबकि 2021 में यह आंकड़ा 15.7% था। मल्टी-लोन एक्सपोजर (Multi-loan Exposure) में यह बढ़ोतरी बरोअर्स पर फाइनेंशियल प्रेशर बढ़ा सकती है, जिससे उनके लोन चुकाने की क्षमता पर असर पड़ सकता है।
आगे चलकर, व्हीकल फाइनेंस सेक्टर की फाइनेंशियल हेल्थ इस बात पर निर्भर करेगी कि लेंडर्स (Lenders) यूज्ड-कार और कमर्शियल सेगमेंट में इन रिस्क को कितनी अच्छी तरह मैनेज करते हैं। इन्वेस्टर्स को क्रेडिट क्वालिटी रिपोर्ट्स (Credit Quality Reports) और लेंडर्स की कमेंट्री (Commentary) पर नज़र रखनी चाहिए ताकि वे रीपेमेंट ट्रेंड्स (Repayment Trends) और ग्रोथ के साथ-साथ डिफॉल्ट रेट्स को कम बनाए रखने की उनकी रणनीति को समझ सकें।
