बाजार में आ रही है बहार: FY27 के लिए उम्मीदें'
मार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि भारत का टू-व्हीलर सेक्टर आने वाले समय में रिकवरी की राह पर है। Crisil Ratings के अनुमान के मुताबिक, फाइनेंशियल ईयर 2027 (FY27) तक वॉल्यूम में 7% से 9% की वृद्धि दर्ज की जा सकती है, जो 29 मिलियन यूनिट के पार निकल जाएगी। यह अच्छी तस्वीर घरेलू मांग में मजबूती और एक्सपोर्ट्स में तेजी से बन रही है। हालांकि, इस पूरी कहानी में एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि अलग-अलग सेगमेंट में प्रदर्शन अलग-अलग हो सकता है, और निवेशकों को कुछ बाहरी आर्थिक फैक्टर्स पर भी बारीकी से नजर रखनी होगी।
डिमांड का बदलता चेहरा: स्कूटर आगे, बाइक पीछे
FY27 में ग्रोथ की कहानी में स्कूटर और मोटरसाइकिल के बीच का अंतर साफ नजर आएगा। जहां मोटरसाइकिल, जो डोमेस्टिक बिक्री का करीब 60% हिस्सा हैं, उनमें मिड-सिंगल-डिजिट यानी थोड़ी कम ग्रोथ की उम्मीद है। वहीं, इलेक्ट्रिक स्कूटर सहित सभी तरह के स्कूटर डबल-डिजिट ग्रोथ दिखा सकते हैं। अर्बन मोबिलिटी की बदलती जरूरतें, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी की जरूरत स्कूटर की मांग को बढ़ा रही है।
इसके अलावा, मोटरसाइकिल सेगमेंट में भी 'प्रीमियमजेशन' का ट्रेंड दिख रहा है। 150-350cc रेंज की बाइक्स की मांग 23% से बढ़कर 25% हो गई है। यह बताता है कि लोगों की एफोर्डेबिलिटी बढ़ी है और वे ज्यादा पावरफुल इंजन वाली बाइक्स पसंद कर रहे हैं। एंट्री-लेवल 125cc से कम की बाइक्स अभी भी 73% शेयर के साथ हावी हैं, लेकिन इनकी ग्रोथ प्रीमियम बाइक्स के मुकाबले धीमी है।
एक्सपोर्ट्स से मिल रही है ताकत, OEMs लगा रहे हैं जोर'
एक्सपोर्ट्स इस सेक्टर के लिए एक बड़ा ग्रोथ बूस्टर बने रहेंगे। इंडस्ट्री वॉल्यूम का लगभग 20% हिस्सा एक्सपोर्ट्स से आता है। Crisil का अनुमान है कि FY27 में एक्सपोर्ट्स में मिड-टू-हाई टीन यानी अच्छी खासी ग्रोथ जारी रहेगी, खासकर लैटिन अमेरिका, अफ्रीका और साउथ एशिया जैसे बाजारों से। इस मांग का फायदा उठाने के लिए ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEMs) अपने डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को बढ़ा रहे हैं और इन रीजन्स के हिसाब से खास प्रोडक्ट ला रहे हैं।
रेवेन्यू में बढ़ोतरी, मार्जिन पर लागत का दबाव'
FY27 में इंडस्ट्री रेवेन्यू 10% से 12% बढ़ सकता है, जबकि पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY26) में यह 15% से 17% बढ़ा था। ऑपरेटिंग मार्जिन लगभग 16% पर स्थिर रहने का अनुमान है। स्टील और एल्युमिनियम जैसी कमोडिटीज के दाम बढ़ने के बावजूद मार्जिन स्थिर रह पाएंगे। इसकी वजह कंपनी की अच्छी इंटरनल अर्निंग्स हैं, जो करीब ₹6,000 करोड़ रहने का अनुमान है। इसी फंड से कैपिटल एक्सपेंडिचर किया जाएगा और लीवरेज रेश्यो कम रखा जाएगा।
जोखिम और चुनौतियां: क्या हैं खतरे?
सकारात्मक वॉल्यूम और रेवेन्यू के अनुमानों के बावजूद, कुछ बड़े जोखिम भी हैं। इंडस्ट्री का प्रदर्शन कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव से जुड़ा हुआ है, जो ऑपरेटिंग मार्जिन को कम कर सकता है। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (E2W) सेगमेंट में 16-18% ग्रोथ का अनुमान है, लेकिन इसमें यूनिट इकोनॉमिक्स की समस्या बनी हुई है। नए E2W प्लेयर्स अभी भी इस चुनौती से जूझ रहे हैं, जबकि पुराने बड़े मैन्युफैक्चरर्स की स्थिति बेहतर है। E2Ws को चलाने की लागत का फायदा तो है, लेकिन सब्सिडी का हटना और बैटरी की कीमतों में धीमी गिरावट से ये इंटरनल कम्बस्चन इंजन (ICE) वाली बाइक्स के मुकाबले महंगे हो रहे हैं।
जनवरी 2026 में, Hero MotoCorp के शेयर का P/E रेश्यो करीब 20-23, TVS Motor का 55-84 और Bajaj Auto का 27-30 के आसपास था। यह निवेशकों के अलग-अलग सेंटीमेंट को दिखाता है। एक्सपोर्ट मार्केट की स्थिरता पर निर्भरता भी एक चिंता का विषय है, क्योंकि इन्फ्लेशन और करेंसी के मुद्दे पहले भी इसका असर डाल चुके हैं।
भविष्य की राह: ग्रोथ के मुख्य फैक्टर'
इस ग्रोथ को बनाए रखने के लिए ग्रामीण और शहरी आय, कमोडिटी की कीमतों की स्थिरता और एक्सपोर्ट मार्केट्स की रिकवरी बहुत जरूरी है। गवर्नमेंट की स्कीम्स जैसे GST में कटौती (जिससे व्हीकल की कीमतें 7-8% कम हुईं) और FAME जैसे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को सपोर्ट करने वाले इनिशिएटिव्स मांग को और बढ़ाएंगे। भारत की ओवरऑल इकोनॉमिक ग्रोथ भी सेक्टर के लिए एक अच्छा माहौल बना रही है। लेकिन, कंपनी को सेगमेंट की पसंद, लागत का दबाव और खास तौर पर इलेक्ट्रिक व्हीकल डोमेन में बदलते कंपीटिशन को मैनेज करना होगा ताकि वे अपनी पूरी ग्रोथ क्षमता का इस्तेमाल कर सकें।