Platinum Duty Hike: कारें होंगी महंगी? ऑटो सेक्टर पर बड़ा असर, देखें डीटेल्स

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AuthorAditya Rao|Published at:
Platinum Duty Hike: कारें होंगी महंगी? ऑटो सेक्टर पर बड़ा असर, देखें डीटेल्स
Overview

भारत सरकार ने देश में प्लैटिनम (Platinum) के इंपोर्ट पर लगने वाले कस्टम ड्यूटी (Custom Duty) को लगभग दोगुना कर दिया है। इस फैसले के बाद उन गाड़ियों की लागत बढ़ने की आशंका है जो कैटेलिटिक कन्वर्टर (Catalytic Converter) पर निर्भर करती हैं, खासकर डीजल एसयूवी (Diesel SUV) और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड (Strong Hybrid) मॉडल। इस कदम से कारें महंगी हो सकती हैं और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) की तरफ झुकाव बढ़ सकता है।

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इंपोर्ट ड्यूटी में बड़ा इज़ाफ़ा

भारत सरकार ने विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) को बचाने और पश्चिम एशिया में बढ़ती भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच प्लैटिनम पर इंपोर्ट ड्यूटी को 6.4% से बढ़ाकर 15.4% कर दिया है। इसका सीधा असर घरेलू ऑटो इंडस्ट्री पर पड़ेगा, खासकर इंटरनल कम्बस्चन इंजन (ICE) वाली गाड़ियों की सप्लाई चेन पर। प्लैटिनम का इस्तेमाल गाड़ियों के एमिशन कंट्रोल सिस्टम (Emission Control System) में कैटेलिटिक कन्वर्टर के लिए होता है। ऐसे में, इस बढ़ोतरी से प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ेगी और उन व्हीकल सेगमेंट्स पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा जिनमें ज्यादा प्लैटिनम की ज़रूरत होती है।

मार्केट का रिएक्शन और कंपनियों की चाल

इस खबर के बाद शेयर मार्केट (Share Market) में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ ऑटो कंपोनेंट सप्लायर के शेयरों में गिरावट आई, जैसे Sharda Motor Industries के शेयर 2.1% गिरकर ₹950 पर पहुंच गए। वहीं, Tata Motors के शेयर 1.2% बढ़कर ₹1250 और Maruti Suzuki के शेयर 1.5% बढ़कर ₹13000 पर ट्रेड करते दिखे।

विश्लेषकों का मानना है कि Maruti Suzuki जैसी बड़ी कंपनियां, जिनकी मार्केट कैप लगभग $35 बिलियन है, इन बढ़ी हुई लागतों को ग्राहकों पर डालने में छोटी कंपनियों से बेहतर स्थिति में होंगी। Tata Motors, जिसकी मार्केट कैप करीब $20 बिलियन है, के लिए डीजल एसयूवी की बड़ी रेंज होने के कारण लागत का सीधा असर ज्यादा होगा। इसी तरह Mahindra & Mahindra, जिसका मार्केट कैप लगभग $25 बिलियन है, भी अपने डीजल-हैवी मॉडल के कारण प्रभावित हो सकती है।

कीमतों में कितनी बढ़ोत्तरी संभव?

नई ड्यूटी के चलते BS-VI एमिशन स्टैंडर्ड (Emission Standards) को पूरा करने की लागत बढ़ जाएगी। इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक, एंट्री-लेवल पेट्रोल कारों की कीमतों में ₹2,500–₹4,000 तक का इजाफा हो सकता है। वहीं, मिड-साइज डीजल एसयूवी की कीमतें ₹8,000–₹12,000 और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड मॉडल्स की कीमतें ₹12,000–₹18,000 तक बढ़ सकती हैं। यह बढ़ोतरी पेट्रोल कारों में 2-4 ग्राम की तुलना में डीजल एसयूवी में 6-10 ग्राम और हाइब्रिड में 10-15 ग्राम प्लैटिनम-ग्रुप मेटल्स (Platinum-Group Metals) के इस्तेमाल के कारण है।

Bosch India (मार्केट कैप $12 बिलियन) और Tenneco (मार्केट कैप $3 बिलियन) जैसी कंपोनेंट बनाने वाली कंपनियों को कॉन्ट्रैक्ट (Contract) पर फिर से बातचीत करनी पड़ सकती है, क्योंकि ज़्यादातर एग्रीमेंट्स में कमोडिटी (Commodity) की कीमतों में बदलाव का क्लॉज (Clause) शामिल होता है। पिछले साल 2023 में हुए ड्यूटी एडजस्टमेंट (Duty Adjustments) के बाद प्रभावित गाड़ियों की कीमतों में 3-5% की बढ़ोतरी देखी गई थी।

EV को मिलेगा बूस्ट?

यह बढ़ी हुई इंपोर्ट ड्यूटी उन ऑटोमोबाइल और कंपोनेंट सप्लायर्स के लिए एक बड़ा रिस्क (Risk) है जो प्लैटिनम-आधारित कैटेलिटिक कन्वर्टर पर निर्भर हैं। अशोक लीलैंड (Ashok Leyland) और टोयोटा किर्लोस्कर मोटर (Toyota Kirloskar Motor) जैसी कंपनियाँ, जिनके पास डीजल एसयूवी और हाइब्रिड वाहनों का बड़ा पोर्टफोलियो है, सीधे तौर पर बढ़ी लागत का सामना करेंगी। यह ड्यूटी का बोझ उन्हें बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल (BEV) बनाने वाली कंपनियों के मुकाबले कमज़ोर स्थिति में ला सकता है। Tata Motors, जो EV सेगमेंट में बड़ा निवेश कर रही है, के मौजूदा ICE ऑपरेशन्स (Operations) अब कम कॉस्ट-कम्पेटिटिव (Cost-Competitive) हो जाएंगे।

Sharda Motor Industries (मार्केट कैप $1.5 बिलियन) जैसी कंपोनेंट सप्लायर्स के लिए बढ़ती लागत को सोखना मुश्किल हो सकता है, जिससे ऑर्डर्स (Orders) पर असर पड़ सकता है। कंपनियाँ अब कैटेलिटिक कन्वर्टर में प्लैटिनम की मात्रा कम करने और प्रीशियस मेटल रीसाइक्लिंग (Precious Metal Recycling) पर तेज़ी से काम कर सकती हैं। सरकार द्वारा इंपोर्ट किए गए स्पेंट कैटेलिस्ट (Spent Catalysts) पर 4.35% की कंसेशनल ड्यूटी (Concessional Duty) रीसाइक्लिंग के ज़रिए धातु को वापस पाने का रास्ता खोलती है। विश्लेषकों का मानना है कि इससे BEV की कॉस्ट-कम्पेटिटिवनेस (Cost-Competitiveness) थोड़ी बेहतर हो सकती है, क्योंकि उनमें कैटेलिटिक कन्वर्टर का इस्तेमाल नहीं होता।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.