भारत का इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल सेक्टर सप्लाई-डिमांड के बड़े अंतर से जूझ रहा है। जहां स्टार्टअप्स ने **₹3,500 करोड़** से ज्यादा का निवेश कर विशाल कैपेसिटी खड़ी कर दी है, वहीं बिक्री की रफ्तार काफी धीमी है।
भारत में इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल इंडस्ट्री इस समय एक कड़वे सच का सामना कर रही है, जहां मैन्युफैक्चरिंग महत्वाकांक्षाएं बाजार की मौजूदा डिमांड से काफी आगे निकल गई हैं। साल 2026 के पहले 9 महीनों के आंकड़े बताते हैं कि स्टार्टअप्स ने ₹3,500 करोड़ से ज्यादा खर्च करके सालाना 4 लाख यूनिट्स की प्रोडक्शन कैपेसिटी तैयार की है। इसके विपरीत, इस दौरान इन वाहनों के रजिस्ट्रेशन का आंकड़ा 24,000 यूनिट्स के स्तर को भी पार नहीं कर पाया है।
बाजार की स्थिति और मुकाबला
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (E2W) के कुल बाजार में इलेक्ट्रिक स्कूटरों का बोलबाला है, जो कुल मार्केट का लगभग 88% हिस्सा कब्जाए हुए हैं। इसकी तुलना में इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिलें अभी भी एक 'निश' (Niche) सेगमेंट बनी हुई हैं, जिनकी हिस्सेदारी महज 11% के करीब है। Oben Electric, Revolt और Ultraviolette जैसी कंपनियों ने अपनी मैन्युफैक्चरिंग और शोरूम नेटवर्क को तेजी से बढ़ाया है, लेकिन रिटेल मार्केट में वैसी मांग नहीं दिख रही है।
लेगेसी कंपनियों का दबाव
स्टार्टअप्स के लिए मुसीबतें दोहरी हैं। एक तरफ ग्राहकों की कम दिलचस्पी है, तो दूसरी तरफ TVS Motor, Bajaj Auto और Hero MotoCorp जैसी दिग्गज कंपनियां अपने मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के साथ इस सेगमेंट में उतर चुकी हैं। इनके पास मौजूद इंफ्रास्ट्रक्चर स्टार्टअप्स के लिए बड़ा खतरा बन गया है, जो रेंच एंजाइटी (Range Anxiety) और ऊंची कीमतों की चुनौतियों से पहले ही जूझ रहे हैं।
भविष्य की राह और जोखिम
निवेशकों के लिए सबसे बड़ा डर सेक्टर में कंसोलिडेशन (Consolidation) का है। यदि बिक्री में तेजी नहीं आती है, तो कम पूंजी वाली छोटी कंपनियों के लिए कैश बर्न को संभालना मुश्किल होगा। हालांकि, सितंबर 2026 में Oben Electric के 1,400 से ज्यादा रजिस्ट्रेशन जैसे आंकड़े उम्मीद जरूर जगाते हैं, लेकिन लंबी रेस में टिकने के लिए कंपनियों को अपनी कैपेसिटी यूटिलाइजेशन और सेल्स के बीच संतुलन बनाना होगा।
