केंद्रीय मंत्री नितीन गडकरी ने इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर के लिए भविष्य की बड़ी तस्वीर पेश की है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक इस मार्केट को **₹20 लाख करोड़** तक पहुंचाना है, जिससे देश में **5 करोड़** नई नौकरियों के अवसर पैदा हो सकते हैं।
इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर तेजी से बढ़ते कदम
भारत अपने ऑटोमोटिव सेक्टर को पूरी तरह बदलने की तैयारी में है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितीन गडकरी ने साफ किया है कि अगले 6 सालों में देश का EV सेक्टर ₹20 लाख करोड़ की वैल्यूएशन छूने की क्षमता रखता है। फिलहाल देश में 57 लाख इलेक्ट्रिक गाड़ियां रजिस्टर्ड हैं, जो कुल बाजार का 7% हिस्सा हैं, और सरकार इसे और भी तेज गति से आगे बढ़ाने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
ग्लोबल मार्केट में भारत की दावेदारी
भारत का मकसद दुनिया का नंबर-1 ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर बनने का है। अगर आंकड़ों पर गौर करें, तो 2014 से अब तक डोमेस्टिक ऑटो इंडस्ट्री ₹14 लाख करोड़ से बढ़कर ₹22 लाख करोड़ पर पहुंच गई है। इस दौड़ में अमेरिका ₹78 लाख करोड़ और चीन ₹47 लाख करोड़ के साथ फिलहाल आगे हैं, लेकिन भारत अब लोकल प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट पर जोर देकर अपनी ग्लोबल रैंकिंग सुधारने में जुटा है। Bajaj Auto और Hero MotoCorp जैसी दिग्गज कंपनियां अपने कुल प्रोडक्शन का आधा हिस्सा एक्सपोर्ट कर रही हैं, जो एक बड़े बदलाव का संकेत है।
लॉजिस्टिक्स कॉस्ट और फ्यूल पर नजर
मैन्युफैक्चरिंग को और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए लॉजिस्टिक्स लागत को कम करना बेहद जरूरी है। IIT मद्रास, IIT कानपुर और IIM बैंगलोर की रिपोर्ट्स बताती हैं कि नए एक्सप्रेसवे और इकोनॉमिक कॉरिडोर के जरिए लॉजिस्टिक्स लागत को 16% से घटाकर 10% तक लाया गया है। सरकार अब इसे 8% तक लाने का लक्ष्य तय कर चुकी है। इसके साथ ही, सालाना ₹22 लाख करोड़ का फॉसिल फ्यूल इंपोर्ट बिल कम करना सरकार की बड़ी प्राथमिकता है, जिसके लिए बायो-फ्यूल को एक लंबी अवधि का विकल्प माना जा रहा है।
