India EV Market: मिड-रेंज में 'जैकपॉट'! बिक्री **77%** उछली, खरीदार टेक्नोलॉजी को दे रहे प्राथमिकता

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
India EV Market: मिड-रेंज में 'जैकपॉट'! बिक्री **77%** उछली, खरीदार टेक्नोलॉजी को दे रहे प्राथमिकता
Overview

भारत का इलेक्ट्रिक पैसेंजर व्हीकल (PV) मार्केट 2025 में **77%** की शानदार ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ के साथ **175,000** यूनिट्स तक पहुंच गया। यह ग्रोथ मुख्य रूप से **₹10-30 लाख** के सेगमेंट में देखी जा रही है, जहाँ खरीदार सिर्फ ईंधन की कीमतों के उतार-चढ़ाव के बजाय एडवांस टेक्नोलॉजी और बेहतर वैल्यू को प्राथमिकता दे रहे हैं।

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भारत में इलेक्ट्रिक पैसेंजर व्हीकल (PV) की बिक्री में आई यह तेजी सिर्फ ग्लोबल सप्लाई की चिंताओं या पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण नहीं है। इसके पीछे एक गहरी वजह है - ग्राहकों की बदलती पसंद।

₹10-30 लाख की प्राइस रेंज में वैल्यू-सीकिंग ग्राहक अब एडवांस टेक्नोलॉजी और रोजमर्रा की उपयोगिता को ज्यादा महत्व दे रहे हैं। यह ट्रेंड ₹10-20 लाख के सेगमेंट में इलेक्ट्रिक पैनेट्रेशन को करीब 48% तक ले गया है। भारतीय ऑटो खरीदार अब सिर्फ दाम नहीं, बल्कि वैल्यू फॉर मनी देख रहा है। जब इस सेगमेंट में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की शुरुआती लागत को लंबी अवधि की उपयोगिता और तकनीकी आकर्षण के साथ संतुलित किया जाता है, तो लोग निवेश करने को तैयार होते हैं।

Vahan पोर्टल के डेटा के अनुसार, 2025 में इलेक्ट्रिक PV की बिक्री रिकॉर्ड 175,000 यूनिट्स रही, जो पिछले साल की तुलना में 77% ज्यादा है। डीलरों का कहना है कि इसमें साल के अंत में दिए गए डिस्काउंट का भी बड़ा हाथ है। हालांकि, यह ग्रोथ ग्राहकों की पसंद में एक ऑर्गेनिक बदलाव को भी दर्शाती है। Tata Motors, जो EV पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में बड़ी हिस्सेदारी रखती है, और Mahindra & Mahindra, जो प्रीमियम इलेक्ट्रिक SUVs पर ध्यान दे रही है, दोनों की वैल्यूएशन उनकी ग्रोथ उम्मीदों को दिखाती है। Tata Motors का P/E रेश्यो लगभग 27.82 है, जबकि Mahindra & Mahindra का 25.86 के आसपास है, जो निवेशकों के विश्वास को दर्शाता है।

₹10 लाख से कम के एंट्री-लेवल सेगमेंट में अब भी कीमत सबसे बड़ा फैक्टर है, जिससे कंपनियों के लिए अच्छी रेंज और फीचर्स देना मुश्किल हो रहा है। वहीं, प्रीमियम सेगमेंट में भी हाई शुरुआती लागत और सीमित मॉडलों की वजह से थोड़ी रुकावटें हैं। Tata Motors अब भी कुल EV मार्केट में लीड कर रही है, हालांकि उसकी हिस्सेदारी थोड़ी कम हुई है क्योंकि मुकाबला बढ़ गया है। MG Motor India ने 'विंडसर' जैसे मॉडलों की बदौलत इस गैप को काफी कम कर लिया है, और Mahindra & Mahindra भी अपनी SUV पेशकशों के दम पर टॉप 3 में तेजी से ऊपर आ रही है। MG Motor India की अपनी मॉडल रेंज में EV पैनेट्रेशन 74.34% है।

हालांकि यह सीधे तौर पर मिड-मार्केट ग्रोथ का कारण नहीं है, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव और फ्यूल सप्लाई की संभावित दिक्कतें एक पृष्ठभूमि चिंता बनी हुई हैं। अगर ईंधन की कीमतों में तेज उछाल आया तो EV की मांग और भी बढ़ सकती है। भारत सरकार की सहायक नीतियां, जैसे कि इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और ई-रिक्शा के लिए 2026 और 2028 तक क्रमशः ₹10,900 करोड़ के कुल आउटले वाली PM E-DRIVE स्कीम का विस्तार, मार्केट डेवलपमेंट को सपोर्ट कर रही है। हालांकि, ये सब्सिडी सीमित हैं और 2025 के अप्रैल से इनकी दरें आधी कर दी गई हैं, जिससे कुछ अनिश्चितता बनी हुई है।

एनालिस्ट्स भारत के EV मार्केट में मजबूत ग्रोथ जारी रहने का अनुमान लगा रहे हैं और 2030 तक महत्वपूर्ण लक्ष्य हासिल होने की उम्मीद है। हालांकि, वर्तमान एडॉप्शन रेट और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की जरूरतों को देखते हुए, FY2030 तक 30% EV सेल्स के महत्वाकांक्षी सरकारी लक्ष्यों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

सकारात्मक रुझानों के बावजूद, कुछ संरचनात्मक कमजोरियां बनी हुई हैं। सरकारी सब्सिडी पर निर्भरता (जो अब रीकैलिब्रेट हो रही है) एक कारक है। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार EV एडॉप्शन की रफ्तार के साथ लगातार तालमेल नहीं बिठा पा रहा है, जिससे कुछ ग्राहकों को 'रेंज एंजायटी' (range anxiety) का सामना करना पड़ रहा है। प्रीमियम EV सेगमेंट में शुरुआती लागतें ज्यादा हैं, और एंट्री-लेवल मार्केट कीमत के प्रति बहुत संवेदनशील है। मुकाबला तेज हो रहा है और नए ग्लोबल प्लेयर के आने की उम्मीद है। इसके अलावा, इंटरनल कम्बशन इंजन (ICE) गाड़ियों की मजबूत पकड़ और स्थापित इंफ्रास्ट्रक्चर, खासकर कीमत-संवेदनशील सेगमेंट में, एक बड़ी बाधा बने हुए हैं।

ऑटोमेकर लॉन्ग-टर्म ग्रोथ को लेकर आशावादी हैं, और भारत का EV ट्रांजिशन मिडिल सेगमेंट से बाहर की ओर फैलता रहेगा। कंपनियां नए EV प्लेटफॉर्म में भारी निवेश कर रही हैं और प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ा रही हैं। उदाहरण के लिए, Mahindra & Mahindra का लक्ष्य मार्च 2026 तक अपनी EV कैपेसिटी को 12,000 यूनिट प्रति माह तक बढ़ाना है और 2030 तक 7 'बॉर्न इलेक्ट्रिक व्हीकल्स' लॉन्च करने की योजना है। सेक्टर का भविष्य निरंतर पॉलिसी सपोर्ट, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ और ऐसी तकनीकी प्रगति पर निर्भर करेगा जो EVs को अधिक लागत-प्रभावी और व्यावहारिक बनाए।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.