India EV Exports: ज़बरदस्त घरेलू मांग के बावजूद, एक्सपोर्ट पर मंडरा रहे ये बड़े ख़तरे!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
India EV Exports: ज़बरदस्त घरेलू मांग के बावजूद, एक्सपोर्ट पर मंडरा रहे ये बड़े ख़तरे!
Overview

घरेलू बाजार में ऑटो सेक्टर की बंपर ग्रोथ और Nifty Auto इंडेक्स के रिकॉर्ड स्तरों के करीब पहुंचने के बावजूद, भारत के इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) एक्सपोर्ट को लेकर एक नई रिपोर्ट चिंताएं बढ़ा रही है। FICCI-Yes Bank की रिपोर्ट के मुताबिक, जहां दुनिया भर में EV की मांग तेजी से बढ़ रही है, वहीं भारत को चीन जैसे देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा, लागत में समानता और इंटरनेशनल स्टैंडर्ड्स को पूरा करने जैसी बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

FICCI और Yes Bank की एक ताज़ा रिपोर्ट ने भारत की इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) एक्सपोर्ट की महत्वाकांक्षाओं पर एक अहम सवाल खड़ा कर दिया है। जहां एक ओर घरेलू बाजार में ऑटो सेक्टर ज़बरदस्त प्रदर्शन कर रहा है और हाल ही में 25 फरवरी, 2026 को Nifty Auto इंडेक्स अपने सर्वकालिक उच्च स्तर (all-time high) के करीब पहुंच गया था, वहीं एक्सपोर्ट के मैदान में असली जंग बाकी है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में EV की बिक्री 2030 तक तीन गुना होने का अनुमान है, जो भारत के लिए एक बड़ा अवसर है। लेकिन, इस मौके का फायदा उठाना चुनौतियों से भरा होगा।

इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत को सबसे बड़ी चुनौती चीन से मिल रही है, जो पहले से ही ग्लोबल व्हीकल प्रोडक्शन में करीब 40% की हिस्सेदारी रखता है और EV बिक्री व मैन्युफैक्चरिंग में बहुत आगे है। चीन की बड़े पैमाने पर उत्पादन क्षमता (economies of scale) और कम लागत भारत के लिए एक बड़ी बाधा है। रिपोर्ट बताती है कि ग्लोबल EV सेल्स 2030 तक कुल मार्केट शेयर का 62% से 86% तक पहुंच सकती है, और इसमें चीन का दबदबा रहने की पूरी संभावना है। ऐसे में, भारत के लिए लागत में समानता (cost parity) लाना एक टेढ़ी खीर साबित हो सकता है।

घरेलू ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री का टर्नओवर FY25 में $80.2 बिलियन तक पहुंच गया और H1 FY26 में एक्सपोर्ट 9.3% बढ़ा भी है, लेकिन चिंता की बात यह है कि इंपोर्ट 12.5% की रफ्तार से ज्यादा बढ़ा है। इसके चलते ट्रेड डेफिसिट (व्यापार घाटा) बढ़ रहा है। यह दिखाता है कि भारत अभी भी कई ज़रूरी कंपोनेंट्स के लिए आयात पर निर्भर है, जो ग्लोबल मार्केट में कॉम्पिटिटिव प्राइसिंग की राह मुश्किल बना रहा है। खासकर लिथियम-आयन बैट्री जैसे अहम पार्ट्स के लिए इंपोर्ट पर निर्भरता को कम करना होगा, तभी एक्सपोर्ट में दमदार वापसी संभव है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत की EV पेनिट्रेशन, जो FY24 में करीब 6% थी, अभी भी विकसित देशों से काफी पीछे है। भारत का कुल ऑटो सेक्टर मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग $150 बिलियन तक पहुंच गया है, और लिस्टेड कंपनियों के P/E रेश्यो 20x से 35x के बीच हैं। कुछ कंपनियों जैसे TVS Motor का P/E 59.37 है, जो शायद बाजार की उम्मीदों को मौजूदा हकीकत से थोड़ा आगे दिखाता है। इसके अलावा, इंटरनेशनल सेफ्टी, साइबर सिक्योरिटी और बैटरी ट्रेसेबिलिटी जैसे कड़े स्टैंडर्ड्स को पूरा करना भी एक बड़ी चुनौती है, जिसके लिए बड़े निवेश और टेक्नोलॉजी अपग्रेड की जरूरत है।

सरकार FAME, PLI जैसी पहलों और बजट 2026 में सेमीकंडक्टर और लॉजिस्टिक्स पर फोकस करके डोमेस्टिक इकोसिस्टम को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTAs) से EU, UK और ऑस्ट्रेलिया जैसे बाजारों तक पहुंच मिल सकती है। लेकिन, डोमेस्टिक स्ट्रेंथ को ग्लोबल एक्सपोर्ट लीडरशिप में बदलने के लिए भारत को सिर्फ वॉल्यूम पर नहीं, बल्कि लागत, टेक्नोलॉजी इनोवेशन और क्वालिटी पर भी दुनिया को यकीन दिलाना होगा। इन गहरी चुनौतियों से पार पाना ही भारत के EV एक्सपोर्ट के भविष्य की कुंजी साबित होगा।

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