दूसरी छमाही में आई बम्पर तेजी!
भारतीय पैसेंजर व्हीकल (PV) इंडस्ट्री ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 का अंत 4.7 मिलियन यूनिट्स की रिकॉर्ड बिक्री के साथ किया, जो पिछले साल से 8.4% की बढ़ोतरी है। यह पिछला रिकॉर्ड 4.34 मिलियन यूनिट्स का था। इस फाइनेंशियल ईयर की दूसरी छमाही में बिक्री में जबरदस्त उछाल देखने को मिला, जिसने पहले की सुस्ती को पीछे छोड़ दिया। इस तेजी के पीछे कई बड़े कारण रहे, जिनमें गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) दरों में हुए बदलावों से ग्राहकों के लिए गाड़ियां और किफायती होना, त्योहारी सीजन में शानदार सेल्स, एसयूवी (SUV) सेगमेंट को ग्राहकों का लगातार पसंद आना, और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) को तेजी से अपनाना शामिल है।
एसयूवी का जलवा, इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ भी दौड़ में!
Maruti Suzuki India Limited ने 2.4 मिलियन से ज्यादा की सालाना बिक्री के साथ अपना पहला स्थान बरकरार रखा है, हालांकि घरेलू बिक्री में 3-4% की मामूली बढ़ोतरी देखी गई। वहीं, अपनी मजबूत एसयूवी पोर्टफोलियो के दम पर Mahindra & Mahindra (M&M) दूसरे नंबर पर आ गई है। Tata Motors ने भी अच्छी पकड़ बनाई है और चौथी तिमाही में दमदार प्रदर्शन किया है। एसयूवी सेगमेंट लगातार अपना मार्केट शेयर बढ़ा रहा है, जबकि बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल (BEV) की बिक्री पिछले साल के मुकाबले 85% से ज्यादा बढ़कर लगभग 2.29 लाख यूनिट्स तक पहुंच गई। इसने कुल PV वॉल्यूम में 2.8% से बढ़कर 4.9% का हिस्सा बना लिया है। Hyundai Motor India की सालाना बिक्री में मामूली गिरावट आई और यह चौथे स्थान पर खिसक गई।
ऑटो कंपनियों की स्ट्रेटेजी और वैल्यूएशन
सेक्टर में कंपनियों के वैल्यूएशन में भी बड़ा अंतर है। Maruti Suzuki, जिसका मार्केट कैप लगभग ₹3.5 ट्रिलियन है, करीब 35x के P/E ratio पर ट्रेड कर रही है। Mahindra & Mahindra, जिसका वैल्यूएशन ₹2.2 ट्रिलियन के आसपास है, अपने एसयूवी की ताकत के कारण लगभग 25x के P/E ratio पर है। Tata Motors, जिसका वैल्यूएशन लगभग ₹1.2 ट्रिलियन है, एडजस्टेड P/E ratio लगभग 15x पर ट्रेड कर रही है, जो उसके EV निवेशों और मार्केट में बढ़त को दर्शाता है। Tata Motors EV टेक्नोलॉजी और बैटरी मैन्युफैक्चरिंग में भारी निवेश कर रही है, जबकि M&M एसयूवी और इलेक्ट्रिक एसयूवी पर ध्यान केंद्रित कर रही है। Hyundai अपने मॉडल्स को बेहतर बना रही है और लोकल EV प्रोडक्शन की योजना बना रही है।
आर्थिक और भू-राजनीतिक दबाव का खतरा
भारतीय PV मार्केट ने ऐतिहासिक रूप से मजबूती दिखाई है और COVID-19 महामारी जैसे मुश्किल दौर से भी उबरकर वापसी की है। हालांकि, मौजूदा मैक्रोइकॉनॉमिक कारक कुछ जोखिम पैदा कर रहे हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें इंटरनल कम्बशन इंजन (ICE) व्हीकल्स की मांग को प्रभावित कर सकती हैं। बढ़ती ब्याज दरें व्हीकल फाइनेंसिंग की लागत बढ़ाती हैं, जिससे ग्राहकों की खर्च करने की क्षमता पर असर पड़ सकता है। जारी भू-राजनीतिक तनाव सप्लाई चेन को भी खतरे में डाल सकते हैं, जिससे सेमीकंडक्टर की कमी और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ने का जोखिम है, जैसा कि अतीत में हुआ है।
फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए अनुमान में कटौती
रिकॉर्ड बिक्री के बावजूद, सेक्टर के सामने फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं। FY26 की दूसरी छमाही में बने उच्च आधार (high base) के कारण समान ग्रोथ रेट बनाए रखना मुश्किल होगा। भू-राजनीतिक तनाव और संभावित सप्लाई चेन की समस्याएँ रुकावटें पैदा कर सकती हैं। Crisil Intelligence का अनुमान है कि इन कारकों के कारण FY27 में घरेलू PV वॉल्यूम में केवल 3-5% की ग्रोथ दर्ज की जा सकती है, जो कि पिछली उम्मीदों से कम है। एनालिस्ट्स मजबूत अंडरलाइंग डिमांड को स्वीकार करते हैं, लेकिन शॉर्ट-टर्म वोलेटिलिटी को लेकर चिंतित हैं। भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि भू-राजनीतिक मुद्दे कितनी जल्दी सुलझते हैं और इंडस्ट्री जारी सप्लाई समस्याओं को कैसे मैनेज करती है।