सरकार के नए BS VII एमिशन नॉर्म्स लागू होने से ऑटोमोबाइल कंपनियों को **FY32** तक **₹1.25 लाख करोड़** का निवेश करना होगा। इस बदलाव से गाड़ियों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है और कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ेगा।
ऑटो सेक्टर के लिए बढ़ी चुनौती
भारत में लागू होने वाले BS VII उत्सर्जन मानकों के कारण ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को अपने इंजन, एग्जॉस्ट सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक टूल्स को पूरी तरह से बदलना होगा। इंडस्ट्री के जानकारों का अनुमान है कि FY32 तक कंपनियों को कुल ₹85,000 करोड़ से ₹1.25 लाख करोड़ का निवेश करना पड़ सकता है।
गाड़ियों की कीमतों में कितनी बढ़ोतरी?
निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल है—क्या कंपनियां इस बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों पर डालेंगी? छोटे पैसेंजर और CNG कारों की मैन्युफैक्चरिंग लागत में ₹15,000 से ₹32,000 तक की बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं, बड़ी डीजल SUVs की बात करें तो यह लागत ₹45,000 से ₹75,000 तक बढ़ सकती है। सबसे अधिक असर कमर्शियल व्हीकल्स पर पड़ेगा, जहाँ प्रति यूनिट लागत ₹2.6 लाख तक ऊपर जा सकती है। कंपनियों के लिए चुनौती यह है कि वे बिना डिमांड को प्रभावित किए कितनी कीमत ग्राहकों से वसूल पाएंगी।
सप्लायर्स के लिए बड़ा मौका
इस बदलाव की शुरुआत अप्रैल 2029 से पैसेंजर कारों के साथ होगी। जहाँ ऑटो मेकर कंपनियों पर खर्च का दबाव बढ़ेगा, वहीं सेंसर, कैटलिस्ट और इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल्स बनाने वाली कंपनियों जैसे Bosch, Tenneco और Cummins के लिए यह ग्रोथ का सुनहरा अवसर है। इसके अलावा, टायर और ब्रेक स्टैंडर्ड्स में बदलाव से Brakes India, Apollo Tyres और CEAT जैसी कंपनियों के प्रोडक्ट्स की डिमांड बढ़ना तय है। निवेशकों को सलाह है कि वे ऑटो कंपनियों के कैपेक्स प्लान और कर्ज के स्तर पर पैनी नजर रखें।
