ऑटो PLI स्कीम: FY27 में ₹4,700 करोड़ का भुगतान, पर इन कंपनियों के लिए मुश्किल!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
ऑटो PLI स्कीम: FY27 में ₹4,700 करोड़ का भुगतान, पर इन कंपनियों के लिए मुश्किल!

भारत सरकार की ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम अगले वित्तीय वर्ष 2026-27 में निवेशकों को बड़ी राहत देने वाली है। अनुमान है कि इस दौरान कंपनियों को **₹4,700 करोड़** से ज़्यादा का इंसेंटिव मिलेगा, जो पिछले साल के मुकाबले दोगुना होगा। हालांकि, यह स्कीम जितनी परिपक्व हो रही है, उतनी ही मुश्किलें भी बढ़ा रही है। 82 शॉर्टलिस्टेड कंपनियों में से सिर्फ **18** ही अभी भुगतान पाने की योग्य हैं, और इसका मुख्य कारण डोमेस्टिक वैल्यू एडिशन (DVA) की सख्त शर्तें हैं।

ऑटो PLI स्कीम में तेजी, पर क्या सभी को मिलेगा फायदा?

केंद्र सरकार ऑटोमोबाइल सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम चला रही है। सरकारी अनुमानों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस स्कीम के तहत कंपनियों को ₹4,700 करोड़ से अधिक का भुगतान किया जाएगा। यह पिछले साल के मुकाबले लगभग दोगुना है, जो दिखाता है कि स्कीम अब अपने ऑपरेशनल फेज में तेजी से आगे बढ़ रही है।

इस स्कीम के तहत, ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री ने 31 मार्च, 2026 तक कुल ₹44,326 करोड़ का निवेश किया है। यह बड़ा निवेश नई और एडवांस्ड ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजीज को सपोर्ट करने के लिए है, और अब कंपनियां इस निवेश पर सरकार से इंसेंटिव पा रही हैं।

82 में से सिर्फ 18 कंपनियां ही क्यों योग्य?

हालांकि, यह स्कीम अपनी मूल भुगतान योजना से थोड़ी पीछे चल रही है। 2022 में शॉर्टलिस्ट की गई कुल 82 कंपनियों में से, केवल 18 कंपनियों के प्रोडक्ट ही फिलहाल इंसेंटिव के योग्य पाए गए हैं। यह दिखाता है कि कंपनियों को लोकल मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं को बढ़ाने में काफी ऑपरेशनल चुनौतियां आ रही हैं।

डोमेस्टिक वैल्यू एडिशन (DVA) की बड़ी बाधा

इस स्कीम के तहत क्वालीफाई करने के लिए सबसे बड़ी शर्त है डोमेस्टिक वैल्यू एडिशन (DVA) की। कंपनियों को यह साबित करना होता है कि उनके कंपोनेंट्स की कम से कम 50% वैल्यू भारत में ही जेनरेट हो रही है। यह नियम लोकल सप्लाई चेन को मजबूत करने के उद्देश्य से लाया गया है, लेकिन उन कंपनियों के लिए एक बड़ा बैरियर बन गया है जो इंपोर्टेड पार्ट्स पर ज्यादा निर्भर हैं।

Bajaj Auto को मिला ₹750 करोड़ का इंसेंटिव

क्वालीफाई करने वाली कंपनियों के लिए इसके सकारात्मक नतीजे दिख रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, Bajaj Auto पहली बड़ी कंपनी थी जिसे अगस्त 2026 में चालू वित्तीय वर्ष के लिए लगभग ₹750 करोड़ का इंसेंटिव मिला। ऐसे भुगतान कंपनियों के कैश फ्लो को मजबूत कर सकते हैं।

निवेशकों के लिए क्या हैं रिस्क?

निवेशकों को DVA के अलावा भी कुछ बातों पर ध्यान देना चाहिए। अतीत में इस स्कीम के बजट में उतार-चढ़ाव देखे गए हैं, जिससे भविष्य के दावों की भविष्यवाणी मुश्किल हो सकती है। साथ ही, इलेक्ट्रिक बस जैसे एडवांस्ड सेगमेंट्स के लिए फाइनेंसिंग भी एक चुनौती है, क्योंकि लोन देने वाले रीसेल मार्केट और बैटरी लाइफ जैसी अनिश्चितताओं को लेकर सतर्क हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या बाकी 82 शॉर्टलिस्टेड कंपनियां 50% वैल्यू-एडिशन थ्रेशोल्ड पार कर पाती हैं या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.