ह्युंडई मोटर इंडिया के एक वरिष्ठ कार्यकारी ने कहा है कि स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल्स (SUVs) वर्तमान में भारत के पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट के लिए मुख्य विकास इंजन हैं। यह रुझान गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) की दरों में कमी के बाद भी देखा जा रहा है, जिसने उपभोक्ताओं को छोटी गाड़ियों के बजाय बड़ी गाड़ियों को अपग्रेड करने के लिए प्रोत्साहित किया है।
ह्युंडई मोटर इंडिया के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर तरुण गर्ग ने बताया कि जहाँ पहले हैचबैक और सेडान प्रमुख थे, वहीं अब एसयूवी बाज़ार का नेतृत्व कर रही हैं। डेटा से पता चलता है कि कुल पैसेंजर व्हीकल बिक्री में हैचबैक की हिस्सेदारी घट रही है, जो जनवरी-अगस्त में 22.4% से गिरकर अक्टूबर में 20% हो गई है। इसके विपरीत, एसयूवी की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है।
जीएसटी दर में कटौती ने ग्राहकों को समान बजट में बड़ी, अधिक महत्वाकांक्षी वाहन खरीदने में सक्षम बनाया है। इससे उपभोक्ता की पसंद छोटी कारों से हटकर कॉम्पैक्ट एसयूवी और बड़े मॉडलों की ओर खिसक गई है।
ह्युंडई मोटर इंडिया एसयूवी को "राष्ट्र का प्रिय" (toast of the nation) मानती है और रिपोर्ट करती है कि वर्तमान में एसयूवी उसकी कुल बिक्री का 71% हिस्सा हैं, और 2030 तक यह 80% तक पहुँचने की उम्मीद है। कंपनी ने अपनी कॉम्पैक्ट एसयूवी, वेन्यू का अपडेटेड संस्करण लॉन्च किया है और इसके विकास में 1,500 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है। ह्युंडई वित्तीय वर्ष 2030 तक 45,000 करोड़ रुपये का महत्वपूर्ण निवेश करने की योजना बना रही है, जिसमें 26 नए मॉडल पेश किए जाएंगे, जिनमें एमपीवी (MPV), ऑफ-रोड एसयूवी और 2027 तक एक समर्पित इलेक्ट्रिक एसयूवी शामिल है। लग्जरी ब्रांड जेनेसिस (Genesis) भी 2027 तक भारत में लॉन्च किया जाएगा।
ह्युंडई सार्वजनिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाकर और बैटरी पैक सहित सप्लाई चेन को स्थानीयकृत करके ईवी (EV) की समग्र लागत को कम करने पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है।
प्रभाव:
यह खबर उन कंपनियों के लिए मजबूत विकास क्षमता का संकेत देती है जिनके पास मजबूत एसयूवी पोर्टफोलियो है। यह निर्माताओं से एक रणनीतिक बदलाव की आवश्यकता का सुझाव देता है, जिससे उन लोगों की बिक्री और मुनाफे में वृद्धि हो सकती है जो जल्दी अनुकूलन करते हैं। भारत में ऑटोमोटिव क्षेत्र में निरंतर गतिशीलता देखने की उम्मीद है।