इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को सरकार का सहारा
भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (Electric Mobility) के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया है। यूनियन बजट 2026-27 में PM E-DRIVE (Electric Drive Revolution in Innovative Vehicle Enhancement) स्कीम के लिए ₹1,500 करोड़ का बड़ा आवंटन किया गया है। यह फंड, ₹10,900 करोड़ की दो-वर्षीय PM E-DRIVE पहल के तहत जारी है, जिसे अक्टूबर 2024 में शुरू किया गया था। इसका मुख्य मकसद देश में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को तेजी से अपनाना और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना है। पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY25-26) में इस स्कीम के लिए ₹4,000 करोड़ का बजट था, जो कि मौजूदा आवंटन से काफी अलग है, लेकिन यह अभी भी सेक्टर पर सरकार के फोकस को दर्शाता है।
PM E-DRIVE स्कीम: लक्ष्य और फंडिंग
PM E-DRIVE स्कीम को दो साल के लिए ₹10,900 करोड़ के कुल बजट के साथ मंजूरी मिली थी। इसका मकसद एक मजबूत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम तैयार करना है। इसमें व्हीकल खरीदने वालों के लिए ₹3,679 करोड़ की सीधी सब्सिडी भी शामिल है, ताकि टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर, एम्बुलेंस और ट्रक जैसे विभिन्न EV सेगमेंट्स को बढ़ावा मिले। साथ ही, प्रमुख शहरों और हाईवे पर पब्लिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने के लिए ₹2,000 करोड़ रखे गए हैं। EV सेक्टर में क्वालिटी और सेफ्टी स्टैंडर्ड को बेहतर बनाने के लिए टेस्टिंग एजेंसियों को आधुनिक बनाने पर ₹780 करोड़ खर्च किए जाएंगे। यह स्कीम पहले की EMPS-2024 और FAME-II स्कीमों के प्रभाव को आगे बढ़ा रही है। पिछले बजट में FY25-26 के लिए ₹4,000 करोड़ का प्रावधान था, जबकि रिवाइज्ड एस्टीमेट ₹1,300 करोड़ थे, वहीं FY24-25 में ₹993.05 करोड़ खर्च हुए थे।
भारत का EV सेक्टर: ग्रोथ और भविष्य
भारत का इलेक्ट्रिक वाहन बाजार तेजी से बढ़ रहा है। अनुमान है कि यह 2024 में USD 5.22 बिलियन से बढ़कर 2030 तक USD 23.52 बिलियन तक पहुंच जाएगा, जो कि लगभग 28.52% की CAGR से बढ़ रहा है। वर्तमान में, कुल वाहन बिक्री में EV की हिस्सेदारी लगभग 7.6% है, जबकि सरकार का लक्ष्य 2030 तक इसे 30% तक ले जाने का है। फिलहाल टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर इस ग्रोथ को लीड कर रहे हैं, लेकिन इलेक्ट्रिक कारें और हैवी ट्रक अभी भी पीछे हैं। FAME-II और PM E-DRIVE जैसी सरकारी योजनाओं ने EV अपनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हालांकि, चार्जिंग स्टेशनों की कमी, खासकर छोटे शहरों में, और EVs की शुरुआती ऊंची कीमत जैसी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। अब सरकार डिमांड सब्सिडी के बजाय डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने पर भी जोर दे रही है, जैसे कि प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम और बैटरी कंपोनेंट्स पर कस्टम ड्यूटी में छूट।
आगे की राह
बजट 2026-27 में PM E-DRIVE स्कीम के लिए किया गया ₹1,500 करोड़ का आवंटन, भारत के ट्रांसपोर्ट सेक्टर को इलेक्ट्रिक बनाने की सरकार की लंबी अवधि की रणनीति को दिखाता है। फंड के इस निरंतर प्रवाह से उत्सर्जन कम करने और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने के विजन को बल मिलता है। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग सपोर्ट में बढ़ता निवेश यह बताता है कि EV को और ज्यादा किफायती और सुलभ बनाने के लिए सरकार नई नीतियां ला रही है। यह सब भारत को अपने क्लीन मोबिलिटी टारगेट्स को हासिल करने में मदद करेगा।