Indian Tyre Industry: एक्सपोर्ट में **16%** का दमदार उछाल, लेकिन मुनाफे पर मंडराया लागत का संकट

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Indian Tyre Industry: एक्सपोर्ट में **16%** का दमदार उछाल, लेकिन मुनाफे पर मंडराया लागत का संकट

भारत का टायर सेक्टर ग्लोबल मार्केट में चमक रहा है। जून **2026** तिमाही में एक्सपोर्ट **16%** बढ़कर **₹7,700 करोड़** के पार पहुंच गया है, लेकिन रॉ मटीरियल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

शानदार एक्सपोर्ट, लेकिन चुनौतियों का दौर

अप्रैल-जून 2026 की तिमाही में भारतीय टायर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने ग्लोबल लेवल पर अपनी धाक जमाई है। एक्सपोर्ट में 16% की सालाना ग्रोथ दर्ज की गई है, जिसमें पैसेंजर कार रेडियल (PCR) कैटेगरी का योगदान 21% रहा है। यूरोपीय बाजारों में मांग 25% बढ़कर ₹3,003 करोड़ तक पहुंच गई है, जबकि अमेरिका भारतीय टायरों के लिए सबसे बड़ा गंतव्य बना हुआ है।

मुनाफे पर दबाव की असली वजह

एक्सपोर्ट के आंकड़े भले ही मजबूत दिख रहे हों, लेकिन अंदरूनी कहानी थोड़ी जटिल है। नेचुरल रबर और क्रूड-लिंक्ड इनपुट (सिंथेटिक रबर और कार्बन ब्लैक) की कीमतों में 35-40% की भारी बढ़ोतरी हुई है। इसका सीधा असर ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ेगा, जिसके फाइनेंशियल ईयर 2027 में गिरकर 12% तक आने का अनुमान है, जबकि पिछले साल यह 14.2% था।

कंपनियों का बड़ा दांव और रिस्क

बढ़ती ग्लोबल मांग को देखते हुए Apollo Tyres, CEAT और JK Tyre जैसी दिग्गज कंपनियां ₹18,000 करोड़ का भारी कैपिटल एक्सपेंडिचर करने की तैयारी में हैं। हालांकि, इस भारी निवेश के साथ-साथ रॉ मटीरियल की महंगाई कंपनियों के कर्ज (Debt) और कैश फ्लो को प्रभावित कर सकती है।

अब आगे क्या होगा?

कंपनियों ने लागत का बोझ ग्राहकों पर डालने के लिए कीमतों में बढ़ोतरी का रास्ता अपनाया है। हालांकि, वेस्ट एशिया में जारी जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण फ्रेट (Freight) से जुड़ी दिक्कतें सप्लाई चेन में नई अनिश्चितताएं पैदा कर रही हैं। निवेशकों के लिए अब यह देखना अहम होगा कि क्या टायर कंपनियां अपनी प्रॉफिटेबिलिटी को बचाए रख पाएंगी और नई कैपेसिटी का समय पर लाभ उठा पाएंगी या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.