भारतीय टू-व्हीलर इंडस्ट्री में सुस्ती का दौर शुरू हो गया है। FY27 की **9.7%** ग्रोथ के मुकाबले, FY28 में यह रफ्तार घटकर महज **2.1%** रहने की आशंका है। डिमांड में कमी के चलते अब निवेशकों के लिए वॉल्यूम ग्रोथ से ज्यादा मार्केट शेयर पर नजर रखना जरूरी हो गया है।
डिमांड में कमी की मुख्य वजह
हाल के वर्षों में टू-व्हीलर सेक्टर में जो तेजी देखी गई थी, वह अब दम तोड़ रही है। सेल्स में उछाल की मुख्य वजह था 'रिप्लेसमेंट साइकिल' का तेजी से चलना, लेकिन अब बाजार सामान्य स्थिति में लौट रहा है। साथ ही, टैक्स से जुड़े लाभों का असर भी कम हो गया है, जिससे नई सेल्स को बढ़ावा मिलना मुश्किल हो रहा है।
सेगमेंट के हिसाब से अलग असर
मोटरसाइकिल सेगमेंट सबसे ज्यादा दबाव में है, क्योंकि इसकी 75% मांग रिप्लेसमेंट पर टिकी है। इसके उलट, स्कूटर सेगमेंट ने अब तक बेहतर लचीलापन दिखाया है और मैन्युफैक्चरर्स के लिए एक बफर का काम कर रहा है।
प्रमुख कंपनियों पर क्या असर?
इस सुस्त माहौल में निवेशक अब कंपनियों के प्रदर्शन पर फोकस कर रहे हैं:
- Bajaj Auto: अपने डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो (कम्यूटर बाइक्स, प्रीमियम रेंज, इलेक्ट्रिक स्कूटर और एक्सपोर्ट) के कारण मजबूत बनी हुई है।
- TVS Motor: स्कूटर की तरफ ग्राहकों के बढ़ते झुकाव का फायदा इसे मिल रहा है।
- Hero MotoCorp: मास-मार्केट मोटरसाइकिल पर ज्यादा निर्भरता के कारण कंपनी डिमांड में नरमी से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकती है।
- Eicher Motors: रॉयल एनफील्ड के साथ प्रीमियम कैटेगरी में होने की वजह से यह कंपनी कम्यूटर सेगमेंट की हलचल से काफी हद तक सुरक्षित है।
निवेशकों के लिए आगे की राह
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इंडस्ट्री में वॉल्यूम रिकवरी FY29 से पहले मुश्किल दिख रही है। अब अगली बड़ी तेजी तभी संभव है जब सैलरी हाइक (Wage Revision) से कंज्यूमर स्पेंडिंग में बढ़ोतरी हो। तब तक निवेशकों को कंपनियों के प्रोडक्ट मिक्स और मार्केट शेयर जीतने की रणनीति पर बारीक नजर रखनी होगी।
