भारतीय ऑटोमोटिव बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल (एसयूवी) और मल्टी-पर्पज व्हीकल (एमपीवी) सेडान को तेजी से पीछे छोड़ रहे हैं। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के आंकड़ों के अनुसार, कुल कार बिक्री में सेडान का हिस्सा वित्तीय वर्ष 2019 में 19% से घटकर वित्तीय वर्ष 2025 में लगभग 9% रह गया है। इसके विपरीत, एसयूवी और एमपीवी अब बाजार का एक बड़ा 65% हिस्सा नियंत्रित करती हैं।
मास-मार्केट सेडान सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं, जिनमें होंडा सिटी (35% कम), हुंडई वर्ना (48% कम), और मारुति सियाज (19% कम) जैसे मॉडलों की बिक्री में बड़ी कमी आई है। इस रुझान के कारण मारुति सुजुकी, हुंडई और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसे मास-मार्केट निर्माता अपने उत्पाद विकास को एसयूवी की ओर जोर-शोर से मोड़ चुके हैं।
हालांकि, लग्जरी कार सेगमेंट एक अलग तस्वीर पेश करता है। बीएमडब्ल्यू इंडिया, मर्सिडीज-बेंज इंडिया और ऑडी इंडिया के लिए, सेडान एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनी हुई हैं, जो उनकी बिक्री का 40% से अधिक हिस्सा हैं। अधिकारियों का कहना है कि बेहतर आराम, अधिक लग्जरी अनुभव और ड्राइवर-चालित अनुभव की प्राथमिकता हाई-एंड सेडान की मांग को बनाए रखने वाले मुख्य कारण हैं। मर्सिडीज ई-क्लास एलडब्ल्यूबी, ऑडी ए5 और ऑडी ए6 जैसे मॉडल मजबूत प्रदर्शन कर रहे हैं।
प्रभाव:
यह खबर भारतीय ऑटोमोटिव उद्योग पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है। मास-मार्केट निर्माताओं को सेडान विकास पर फिर से विचार करने की आवश्यकता हो सकती है, जबकि एसयूवी पर ध्यान केंद्रित करना होगा, जिससे उनके बिक्री की मात्रा और बाजार हिस्सेदारी पर असर पड़ सकता है। लग्जरी कार निर्माता, जो अभी भी सेडान पर निर्भर हैं, अपनी एसयूवी रणनीतियों में समायोजन कर सकते हैं। समग्र बाजार की गतिशीलता और उपभोक्ता प्राथमिकताएं स्पष्ट रूप से बदल रही हैं, जो ऑटो क्षेत्र में निवेश निर्णयों को प्रभावित करेंगी।
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