मार्केट में पुरानी कंपनियों की पकड़ मजबूत
सप्लाई चेन की रुकावटों के कारण मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में E2W मार्केट की ग्रोथ 12-13% पर सीमित रही, लेकिन अब रेयर-अर्थ मैग्नेट की सप्लाई सुधरने से अगले फाइनेंशियल ईयर में यह 16-18% तक पहुंचने का अनुमान है। इस सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच, पुराने और स्थापित मैन्युफैक्चरर्स अपनी मजबूत स्थिति का फायदा उठा रहे हैं।
जनवरी 2026 में, TVS Motor ने 34,440 यूनिट्स की बिक्री के साथ मार्केट में अपनी लीड बरकरार रखी, जो कि 28% मार्केट शेयर है और कंपनी की अब तक की सबसे हाईएस्ट मंथली सेल्स है। वहीं, Bajaj Auto 25,520 यूनिट्स ( 21% मार्केट शेयर) के साथ दूसरे स्थान पर रही, खासकर अपने नए अफोर्डेबल मॉडल Chetak C2501 के लॉन्च के बाद। Hero MotoCorp का EV ब्रांड Vida भी मजबूत ग्रोथ दिखा रहा है। इन पुरानी कंपनियों को उनके बड़े डीलर नेटवर्क और बेहतर आफ्टर-सेल्स सर्विस का लाभ मिल रहा है।
नए प्लेयर्स की बढ़ती परेशानियां
दूसरी ओर, नए और ए-एज प्लेयर्स को मार्केट शेयर में भारी गिरावट का सामना करना पड़ रहा है। Ola Electric की मार्केट में हिस्सेदारी गिरकर 6% के करीब आ गई है, जिसने जनवरी 2026 में केवल 7,512 यूनिट्स बेचीं, जो कि पिछले साल की तुलना में 69% की गिरावट है। इसका मुख्य कारण ग्राहकों की चिंताओं, प्रोडक्ट रिलायबिलिटी (reliability) और कमजोर यूनिट इकोनॉमिक्स (unit economics) को बताया जा रहा है।
Ather Energy ने साल-दर-साल 67% की ग्रोथ (जनवरी 2026 में) दर्ज की है, लेकिन वह 18% मार्केट शेयर पर है। मार्केट में अब रिलायबिलिटी और सर्विस को सबसे बड़ा differentiator माना जा रहा है, जहां पुरानी कंपनियां बाजी मार रही हैं। Ather Energy का मार्केट कैप लगभग ₹26,634 करोड़ है, जबकि Ola Electric का मार्केट कैप ₹13,982 करोड़ (फरवरी 4, 2026 तक) है।
सरकारी नीतियां और भविष्य का रुख
भारत सरकार PM E-DRIVE जैसी स्कीम्स के ज़रिये E2W सेक्टर को लगातार सपोर्ट कर रही है, जिसका मकसद एडॉप्शन (adoption) बढ़ाना और लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है। EVs का कम रनिंग कॉस्ट (लगभग 3 पैसा/किमी बनाम ICE व्हीकल्स का ₹2-2.5/किमी) भी एक बड़ा फैक्टर है। हालांकि, बदलती प्रतिस्पर्धा यह दर्शाती है कि भविष्य में ग्रोथ उन्हीं प्लेयर्स को मिलेगी जो मुनाफा कमाते हुए बड़े पैमाने पर ऑपरेशन कर सकेंगे और बेहतर प्रोडक्ट क्वालिटी व सर्विस दे पाएंगे। बैटरी कॉस्ट में कमी का धीमा होना और सब्सिडियों का कम होना यह भी बताता है कि प्राइस-लेड कॉम्पिटिशन (price-led competition) कम हो रहा है, और ब्रांड लॉयल्टी (brand loyalty) व कस्टमर सेटिस्फेक्शन (customer satisfaction) जैसी चीजें ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई हैं, जिसमें पुरानी कंपनियां बेहतर स्थिति में हैं। भारतीय ऑटोमोटिव इंडस्ट्री के $300 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें EVs की भूमिका अहम होगी।
