ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की संस्था SIAM सरकार से Bharat Stage 7 (BS7) उत्सर्जन मानकों को लागू करने की समयसीमा **2030** से बढ़ाकर **2032-2035** करने की मांग कर रही है। इस कदम का उद्देश्य तकनीकी चुनौतियों और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी से निपटना है।
भारत में ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए आने वाले दिन बड़े बदलावों वाले हो सकते हैं। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) जल्द ही सरकार के सामने एक प्रस्ताव रखने वाली है, जिसमें BS7 उत्सर्जन मानकों के लागू होने की डेडलाइन को आगे बढ़ाने की मांग की जाएगी। इंडस्ट्री की योजना है कि इस बदलाव को दो चरणों में 2032 से 2035 के बीच लागू किया जाए।
तकनीकी चुनौतियां और नई शर्तें
BS7 का ट्रांजिशन पहले के बदलावों से काफी अलग और जटिल है। इस बार केवल इंजन में सुधार काफी नहीं होगा। नई पॉलिसी में पेट्रोल इंजन के लिए गैसोलीन पार्टिकुलेट फिल्टर्स और ब्रेक-टायर घिसने से निकलने वाली धूल (Non-exhaust emissions) जैसे मानकों को भी शामिल करने की योजना है। खास बात यह है कि पहली बार इलेक्ट्रिक गाड़ियों को भी इन सख्त उत्सर्जन नियमों के दायरे में लाया जा सकता है। फिलहाल, देश में इन मानकों को मापने के लिए जरूरी टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है, जिस वजह से कंपनियां प्रोडक्ट प्लानिंग को लेकर असमंजस में हैं।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
इन्वेस्टर्स की नजर इस फैसले पर इसलिए भी है क्योंकि इसका सीधा असर ऑटो कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ेगा। कड़े मानकों का मतलब है R&D और फैक्ट्रियों के आधुनिकीकरण पर भारी-भरकम खर्च। अगर सरकार 2030 की समयसीमा पर कायम रहती है, तो कंपनियों को अचानक बड़ा कैपिटल एक्सपेंडिचर करना होगा, जिसका बोझ ग्राहकों की जेब पर पड़ सकता है। फिलहाल, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) इस पर ड्राफ्ट फ्रेमवर्क तैयार कर रहा है। आने वाले समय में सरकारी नोटिफिकेशन ही तय करेगा कि कंपनियों को राहत मिलेगी या उन्हें तय समय में ही यह बड़ी तैयारी पूरी करनी होगी।
