फेस्टिव सीजन के चलते भारत की दिग्गज कार निर्माता कंपनियां अपनी प्रोडक्शन क्षमता बढ़ा रही हैं। सितंबर में होलसेल डिस्पैच में **24%** की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की गई है, लेकिन निवेशकों की नजर अब इन कंपनियों के मार्जिन पर है कि क्या वे बढ़ते लागत दबाव के बीच मुनाफे को बरकरार रख पाएंगी।
त्योहारों के इस सीजन में भारतीय पैसेंजर व्हीकल बाजार में एक बड़ी तैयारी देखी जा रही है। नवरात्र, दशहरा और दिवाली के लिए कंपनियां अपने शोरूम्स को पूरी तरह स्टॉक करने में जुटी हैं, ताकि बुकिंग्स को सीधे सेल्स में बदला जा सके और ग्राहकों को किसी और कंपनी की ओर जाने से रोका जा सके।
प्रमुख कंपनियों की रणनीति
- Maruti Suzuki: कंपनी के पास फिलहाल 2.2 लाख गाड़ियों की पेंडिंग बुकिंग है, जो लगभग 16 दिन के इन्वेंट्री के बराबर है। इसे पूरा करने के लिए कंपनी ने दो नई प्रोडक्शन लाइन शुरू की हैं।
- Hyundai Motor India: कंपनी ने अपने डीलर नेटवर्क पर 4 से 5 हफ्ते का स्टॉक तैयार रखा है ताकि ग्राहकों को गाड़ी की तुरंत डिलीवरी मिल सके।
- Mahindra & Mahindra: कंपनी ने अपनी मंथली मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को बढ़ाकर 68,000 यूनिट्स कर दिया है, ताकि SUV और इलेक्ट्रिक गाड़ियों के वेटिंग पीरियड को कम किया जा सके।
क्या है निवेशकों के लिए खतरा?
सितंबर में 24% की होलसेल बढ़ोतरी हुई जरूर है, लेकिन मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह डीलर स्टॉकिंग का नतीजा ज्यादा है। असल पिक्चर आने वाले हफ्तों की रिटेल सेल्स से साफ होगी। सबसे बड़ा रिस्क 'मार्जिन प्रेशर' का है। अगर डिमांड उम्मीद के मुताबिक नहीं रही और कंपनियों को इन्वेंट्री निकालने के लिए भारी डिस्काउंट देना पड़ा, तो इसका सीधा असर कंपनी के मुनाफे और कैश फ्लो पर पड़ेगा। निवेशकों को अब त्योहारी सीजन के बाद आने वाले रिटेल सेल्स डेटा पर नजर रखनी चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि डिमांड में कितनी मजबूती है।
