कच्चे माल की बढ़ती लागत और मार्जिन पर दबाव के बीच भारतीय ऑटो कंपोनेंट कंपनियां अब मैन्युफैक्चरिंग से आगे बढ़कर हाई-मार्जिन सर्विसेज और एडवांस टेक्नोलॉजी पर दांव लगा रही हैं।
ऑटो कंपोनेंट सेक्टर की बड़ी कंपनियां अब केवल पारंपरिक पुर्जे बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहतीं। रॉ मटेरियल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और घटते प्रॉफिट मार्जिन से निपटने के लिए कंपनियां अब सर्विस सेक्टर और नई मैन्युफैक्चरिंग तकनीकों को अपना रही हैं।
Amara Raja का सर्विस पर दांव
Amara Raja Energy & Mobility ने अब 'Amaron Assist' ब्रांड के तहत व्हीकल मेंटेनेंस और मोबिलिटी सर्विस में कदम रखा है। कंपनी इसके लिए तेलंगाना में ₹100 करोड़ का निवेश कर रही है। यह कदम उनके कोर बैटरी बिजनेस के अलावा एक ऐसी इनकम स्ट्रीम बनाने की कोशिश है जो कम अस्थिर हो। कंपनी साथ ही अपने बैटरी पैक और LFP सेल मैन्युफैक्चरिंग के लिए ₹2,320 करोड़ का बड़ा निवेश भी कर रही है।
नई टेक्नोलॉजी से बेहतर एफिशिएंसी
अन्य कंपनियां भी अपने ऑपरेशन को धार दे रही हैं:
- Belrise Industries: जापान की Yamato के साथ करार कर यह कंपनी अब रेजिन-बेस्ड एयर इनटेक मैनिफोल्ड्स बनाएगी। इससे गाड़ियों का वजन कम होगा और फ्यूल एफिशिएंसी बढ़ेगी।
- Samvardhana Motherson: कंपनी 'Spinheat' नाम की एक नई मैग्नेटिक इंडक्शन तकनीक पर काम कर रही है। इसकी मदद से कंपोनेंट कोटिंग का समय 24 घंटे से घटकर मात्र 1 घंटा हो सकता है। यह तकनीक न केवल बिजली बचाएगी बल्कि इन्वेंट्री कॉस्ट को भी कम करेगी।
निवेशकों के लिए चुनौतियां
ये सभी बदलाव भले ही भविष्य के लिए अच्छे लगें, लेकिन मार्जिन की चुनौती अभी भी बनी हुई है। हाल ही में Amara Raja का नेट प्रॉफिट 44.8% गिरा है, जो सेक्टर पर दबाव को दर्शाता है। निवेशकों के लिए यह देखना जरूरी है कि ये नई तकनीकें और सर्विस सब्सिडियरी कितनी जल्दी कमर्शियल स्केल पर सफल होती हैं और कंपनी के बॉटम-लाइन पर कितना असर डालती हैं।
