Indian Auto Sector: टैलेंट की भारी किल्लत! मैन्युफैक्चरिंग में महिलाओं की कम भागीदारी बनी चुनौती

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AuthorNeha Patil|Published at:
Indian Auto Sector: टैलेंट की भारी किल्लत! मैन्युफैक्चरिंग में महिलाओं की कम भागीदारी बनी चुनौती

भारतीय ऑटो सेक्टर में वर्कफोर्स का असंतुलन एक बड़ी समस्या बनकर उभर रहा है। मैन्युफैक्चरिंग रोल में महिलाओं की भागीदारी केवल **8.7%** है। Tata Motors और JSW MG Motor India जैसे नाम जरूर आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन ब्रॉड मैन्युफैक्चरिंग के **25%** के औसत से यह सेक्टर अभी काफी पीछे है। निवेशकों के लिए यह टैलेंट गैप लंबी अवधि में प्रोडक्शन क्षमता और ऑपरेशनल एफिशिएंसी के लिए एक बड़ा रिस्क है।

मैन्युफैक्चरिंग पर मंडराया संकट

भारतीय ऑटोमोटिव मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री में वर्कफोर्स की भारी कमी देखी जा रही है, जिसका मुख्य कारण शॉपफ्लोर पर बढ़ता जेंडर गैप है। 66वें ACMA एनुअल सेशन में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2026 तक OEM और कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में महिलाओं की भागीदारी केवल 8.7% रही। हालांकि, यह 2023 के 5.6% से बेहतर है, लेकिन ब्रॉड मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के 25% के औसत से तुलना करें तो इंडस्ट्री अभी काफी पीछे है।

विकास पर क्या होगा असर?

निवेशकों और बिजनेस एनालिस्ट्स के लिए यह सिर्फ एक सोशल डेटा नहीं, बल्कि ऑपरेशंस के लिए गंभीर चिंता का विषय है। साल 2025-26 के दौरान, 80% एम्प्लॉयर्स ने माना है कि उन्हें ट्रेन प्रोफेशनल ढूंढने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। अगर ऑटो सेक्टर इस टैलेंट पूल का सही इस्तेमाल नहीं कर पाया, तो सरकार के 2047 के मैन्युफैक्चरिंग लक्ष्यों तक पहुंचने की राह में बड़ी रुकावट आ सकती है और प्रोडक्शन स्केल सुस्त पड़ सकता है।

इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौतियां

मैन्युफैक्चरिंग प्लांट अक्सर 24x7 और तीन-शिफ्ट मॉडल पर काम करते हैं। महिला कर्मचारियों को इन रोटेशंस में शामिल करने के लिए सुरक्षित ट्रांसपोर्ट, चाइल्डकैअर सुविधाएं और फैक्ट्रियों के इंफ्रास्ट्रक्चर को अपडेट करने में भारी लागत आती है। यही कारण है कि हाई-आउटपुट एनवायरनमेंट में महिलाओं की तैनाती सीमित है।

EV सेगमेंट से बंधी उम्मीद

इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेगमेंट में ट्रेंड थोड़ा अलग है, जहां महिला भागीदारी 11% से 15% के बीच देखी जा रही है। JSW MG Motor India, Tata Motors और Hero MotoCorp जैसी कंपनियां पहले ही बड़े स्तर पर हायरिंग प्रोग्राम चला रही हैं। हालांकि, असल चुनौती तकनीकी शिक्षा ले रही छात्राओं की कम संख्या का है।

निवेशकों के लिए संकेत

निवेशकों को उन कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए जो वर्कफोर्स डायवर्सिटी और अपस्किल्ड मैनपावर पर काम कर रही हैं। जो कंपनियां ट्रेडिशनल लेबर पर अपनी निर्भरता कम करके नई प्रतिभाओं को अपनाएंगी, उनकी ऑपरेशनल रेजिलिएंस और प्रोडक्टिविटी में लंबी अवधि में बेहतर सुधार देखने को मिल सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.