जून 2026 में भारत में पैसेंजर व्हीकल की बिक्री **24%** बढ़कर **3,88,144** यूनिट्स रही। यह लगातार तीसरी तिमाही है जब इंडस्ट्री ने दोहरे अंकों की ग्रोथ दर्ज की है। मजबूत डोमेस्टिक डिमांड और नए मॉडल्स के लॉन्च ने इस शानदार प्रदर्शन में अहम भूमिका निभाई, जिससे अप्रैल-जून तिमाही में अब तक की सबसे ज़्यादा बिक्री का रिकॉर्ड बना।
सेगमेंट की ग्रोथ और तिमाही के रिकॉर्ड्स
यह तेज़ी सिर्फ पैसेंजर कारों तक ही सीमित नहीं रही। जून में टू-व्हीलर सेगमेंट में 19% और थ्री-व्हीलर सेगमेंट में 26% की ज़बरदस्त ग्रोथ देखी गई। स्कूटर्स की डिमांड 39.1% उछलकर 7,44,823 यूनिट्स तक पहुंच गई, जबकि बाइक्स की बिक्री में 6.4% की स्थिर बढ़ोतरी हुई।
इस मासिक प्रदर्शन के दम पर 2026-27 फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) ऑटो इंडस्ट्री के लिए रिकॉर्ड तोड़ साबित हुई। इस दौरान पैसेंजर व्हीकल की बिक्री 26% बढ़कर 12.7 लाख यूनिट्स पर पहुंच गई। वहीं, थ्री-व्हीलर्स की बिक्री 0.21 मिलियन यूनिट्स और कमर्शियल व्हीकल्स की 0.27 मिलियन यूनिट्स के साथ रिकॉर्ड स्तर पर रहीं। टू-व्हीलर्स की बिक्री में भी 20% का उछाल आया, जो 5.63 मिलियन यूनिट्स तक पहुंच गई।
डिमांड के पीछे के कारण और इंडस्ट्री का नज़रिया
सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के लीडर्स का कहना है कि इस ग्रोथ के पीछे कई फैक्टर हैं, जिनमें डोमेस्टिक डिमांड का स्थिर रहना और नए कार मॉडल्स का उपलब्ध होना शामिल है। इसके अलावा, आसान फाइनेंसिंग और पिछले साल की तुलना में कम बेस इफेक्ट ने भी इंडस्ट्री को फायदा पहुंचाया। पहली तिमाही में महंगाई के बावजूद कंज्यूमर स्पेंडिंग मजबूत बनी रही, लेकिन अब मैन्युफैक्चरर्स इनগুলোর को ऑपरेशनल अनिश्चितताओं के बीच बैलेंस कर रहे हैं।
आगे आने वाले फेस्टिव सीज़न पर नज़रें टिकी हैं, जो आमतौर पर बिक्री का पीक टाइम होता है। हालांकि, मैन्युफैक्चरर्स उन जोखिमों पर भी पैनी नज़र रख रहे हैं जो प्रोडक्शन और प्रॉफिट मार्जिन्स को प्रभावित कर सकते हैं। पश्चिम एशिया में जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट फ्यूल और गैस सप्लाई चेन पर असर डाल सकते हैं, जो चिंता का एक बड़ा विषय है। इसके अलावा, हालिया बारिश ने एग्रीकल्चरल प्रॉस्पेक्ट्स को बेहतर बनाया है, लेकिन इंडस्ट्री रूरल डिमांड पर भी बारीकी से नज़र रख रही है, क्योंकि यह टू-व्हीलर और एंट्री-लेवल व्हीकल्स के लिए एक बड़ा बूस्टर है। कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी एक लगातार बनी रहने वाली चिंता है, जिस पर निवेशक आने वाली तिमाही रिपोर्ट्स में ध्यान दे सकते हैं, क्योंकि ये सीधे तौर पर प्रमुख मैन्युफैक्चरर्स के ऑपरेटिंग मार्जिन्स को प्रभावित करती हैं।
