जून महीने में भारत में गाड़ियों की रिटेल बिक्री में **21.8%** की ज़बरदस्त बढ़ोतरी हुई है। FADA के आंकड़ों के मुताबिक, कुल **26 लाख** यूनिट्स बिकीं। पैसेंजर व्हीकल की बिक्री **28.6%** बढ़ी, क्योंकि महंगे पेट्रोल-डीज़ल की वजह से ग्राहक इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और CNG गाड़ियों की ओर बढ़ रहे हैं। इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स ने **10.6%** मार्केट शेयर के साथ रिकॉर्ड बनाया, जो ग्राहकों की बदलती पसंद को दर्शाता है।
जून में ऑटो सेक्टर की बंपर सेल
भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर ने जून में अब तक का सबसे शानदार प्रदर्शन किया है। FADA (Federation of Automobile Dealers Associations) के जारी आंकड़ों के अनुसार, जून में कुल 2.6 मिलियन (यानी 26 लाख) गाड़ियों की रिटेल बिक्री हुई, जो पिछले साल के मुकाबले 21.8% ज़्यादा है। इस ग्रोथ में पैसेंजर व्हीकल्स का बड़ा योगदान रहा, जिनकी बिक्री 28.6% बढ़कर 410,853 यूनिट्स तक पहुंच गई।
वैकल्पिक ईंधन वाली गाड़ियों की ओर झुकाव
पश्चिम एशिया में चल रही उथल-पुथल के कारण बढ़ती ईंधन कीमतों ने ग्राहकों के खरीदारी के तरीके को काफी बदल दिया है। अब कुल पैसेंजर व्हीकल रिटेल बिक्री में 40.35% हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और CNG जैसी वैकल्पिक ईंधन वाली गाड़ियों की है। इनमें CNG मॉडल 24.3% मार्केट शेयर के साथ सबसे आगे रहे, जबकि हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक पैसेंजर व्हीकल्स की हिस्सेदारी क्रमशः 8.3% और 7.8% रही। Maruti Suzuki ने CNG गाड़ियों की बुकिंग में 40% की बढ़ोतरी दर्ज की है, जो बताता है कि बढ़ती पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों के चलते ग्राहक अब कम रनिंग कॉस्ट को ज़्यादा महत्व दे रहे हैं।
टू-व्हीलर मार्केट और EV को बढ़ावा
टू-व्हीलर सेगमेंट में इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EVs) ने एक अहम मुकाम हासिल किया है। जून में कुल इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की बिक्री 10.6% रही, जो पहली बार डबल डिजिट में पहुंची है। इस सेगमेंट में TVS Motor 24.5% मार्केट शेयर के साथ सबसे आगे है, वहीं Bajaj Auto 22.4% के साथ दूसरे स्थान पर है। Tata Motors इलेक्ट्रिक पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में अपनी लीड बनाए हुए है, और इस कैटेगरी में कुल रजिस्ट्रेशन पहली बार 30,000 यूनिट्स से ऊपर चले गए हैं।
जोखिम और भविष्य की राह
ऑटो सेक्टर में भले ही दमदार ग्रोथ दिख रही हो, लेकिन भविष्य में कुछ चुनौतियां भी हैं। एनालिस्ट्स का मानना है कि ग्रामीण मांग, जो सेक्टर के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, मॉनसून पर निर्भर करती है। अगर मॉनसून कमजोर रहा तो खेती-बाड़ी से जुड़ी आय पर असर पड़ सकता है, जिससे एंट्री-लेवल गाड़ियों की बिक्री प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, सप्लाई चेन की दिक्कतें कम हुई हैं, लेकिन महंगी हो रही टेक्नोलॉजी और बेहतर प्रोडक्ट लाइन-अप के कारण लागत प्रबंधन एक चुनौती बना रहेगा। ऐसे में, investors को Mahindra & Mahindra, TVS Motor, Bajaj Auto, और Maruti Suzuki जैसी कंपनियों पर नज़र रखनी होगी कि वे इन विस्तार योजनाओं और संभावित मार्जिन दबाव के बीच कैसे संतुलन बनाते हैं।
