भारत का ऑटोमोबाइल सेक्टर FY27 की पहली तिमाही में रॉकेट की तरह दौड़ा है! पैसेंजर व्हीकल की होलसेल बिक्री रिकॉर्ड **12.73 लाख** यूनिट्स तक पहुंच गई है। जून में अकेले **24.1%** की सालाना ग्रोथ देखी गई। टू-व्हीलर्स और कमर्शियल व्हीकल्स की ज़बरदस्त डिमांड ने इस ग्रोथ में चार चांद लगाए।
यूटिलिटी व्हीकल्स की धूम
इस शानदार प्रदर्शन के पीछे सबसे बड़ा हाथ यूटिलिटी व्हीकल्स (UVs) का रहा, जिनकी डिमांड में 28.6% का उछाल आया और यह 8.62 लाख यूनिट्स तक पहुंच गया। UVs अब कुल पैसेंजर व्हीकल सेल्स का लगभग 68% हिस्सा रखती हैं। पैसेंजर कार की बिक्री भी 21.3% बढ़कर 3.68 लाख यूनिट्स पर पहुंच गई, जबकि वैन की बिक्री में 14.8% की ग्रोथ देखी गई।
टू-व्हीलर्स और कमर्शियल व्हीकल्स भी चमके
सिर्फ पैसेंजर कारें ही नहीं, बल्कि टू-व्हीलर सेगमेंट ने भी अब तक की सबसे मजबूत पहली तिमाही दर्ज की, जिसमें कुल 56.29 लाख यूनिट्स की बिक्री हुई। स्कूटर्स की बिक्री 30.8% बढ़कर 21.79 लाख यूनिट्स पर पहुंच गई, वहीं मोटरसाइकिल की बिक्री में 14% की बढ़ोतरी हुई। कमर्शियल व्हीकल्स की बात करें तो 2.65 लाख यूनिट्स की बिक्री हुई, जो माइनिंग और सीमेंट जैसे सेक्टर्स में बढ़ी हुई एक्टिविटी और रिप्लेसमेंट डिमांड का नतीजा है। थ्री-व्हीलर सेगमेंट ने भी 2.14 लाख यूनिट्स की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की।
एक्सपोर्ट में भी रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन
घरेलू बाजार की सफलता के साथ-साथ, इस तिमाही में ऑटो एक्सपोर्ट्स ने भी रिकॉर्ड स्तर छुआ। थ्री-व्हीलर्स का एक्सपोर्ट 57.7% बढ़ा, कमर्शियल व्हीकल्स 43.3% और टू-व्हीलर्स 36.6% की रफ़्तार से एक्सपोर्ट हुए।
आगे क्या? निवेशकों के लिए अहम बातें
बाजार में डिमांड तो मजबूत बनी हुई है, लेकिन इंडस्ट्री को कुछ जोखिमों पर भी नज़र रखनी होगी। कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव (Volatility) मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट और प्रॉफिट मार्जिन पर असर डाल सकता है। साथ ही, आने वाले फेस्टिव सीजन में डिमांड कैसी रहती है और मैक्रोइकॉनॉमिक स्टेबिलिटी कितनी बनी रहती है, यह देखना अहम होगा। ये तिमाही बिक्री के आंकड़े कंज्यूमर स्पेंडिंग और इंडस्ट्री की हेल्थ का अहम इंडिकेटर माने जाते हैं।
