Auto Sector Boom: इनकम में **9.1%** की उछाल से चमकी ऑटो कंपनियां, गाड़ियों की बंपर बिक्री

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AuthorNeha Patil|Published at:
Auto Sector Boom: इनकम में **9.1%** की उछाल से चमकी ऑटो कंपनियां, गाड़ियों की बंपर बिक्री

भारत में पैसेंजर व्हीकल की डिमांड में जोरदार तेजी आई है। डिस्पोजेबल इनकम में **9.1%** की बढ़ोतरी ने गाड़ियों की कीमतों में मामूली इजाफे को बेअसर कर दिया है। **18%** GST वाले मिड-रेंज सेगमेंट में बिक्री **29%** बढ़कर **1.24 मिलियन** यूनिट्स के पार पहुंच गई है, जिससे निवेशकों की नजरें अब आने वाले फेस्टिव सीजन पर टिकी हैं।

भारत के पैसेंजर व्हीकल बाजार में एक दिलचस्प ट्रेंड देखने को मिल रहा है, जहां परिवारों की कमाई में इजाफा गाड़ियों की बढ़ती कीमतों से कहीं ज्यादा है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में ग्रॉस नेशनल डिस्पोजेबल इनकम में 9.1% की वृद्धि ने मध्यम वर्ग की परचेजिंग पावर को काफी मजबूती दी है। वहीं दूसरी ओर, मैन्युफैक्चरर्स ने पिछले एक साल में कीमतों में 5% से भी कम की बढ़ोतरी की है, जिससे नई गाड़ियां ग्राहकों के लिए किफायती बनी हुई हैं।

GST ब्रैकेट का कमाल

बाजार में सबसे ज्यादा हलचल 18% GST वाले टैक्स ब्रैकेट में है। अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच इस कैटेगरी में सेल्स 29% उछलकर 1.24 मिलियन यूनिट्स हो गई है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि सितंबर 2025 में लागू हुए GST 2.0 रिफॉर्म्स का असर अभी भी ग्राहकों के बजट पर सकारात्मक पड़ रहा है। प्रीमियम सेगमेंट का हाल भी कुछ ऐसा ही है, जहां 40% टैक्स स्लैब के बावजूद सेल्स में 21% की ग्रोथ दर्ज की गई है, जो दिखाता है कि Hyundai Creta जैसी प्रीमियम SUVs का क्रेज अभी भी कम नहीं हुआ है।

कंपनियों का आउटलुक

Tata Motors जैसे दिग्गज खिलाड़ी इस फाइनेंशियल ईयर के बाकी हिस्से को लेकर काफी उत्साहित हैं। कंपनी को उम्मीद है कि ऑटो इंडस्ट्री की दूसरी छमाही में 10% की ग्रोथ देखने को मिलेगी। अभी Tata Punch, Maruti Suzuki Alto और WagonR जैसे मॉडल्स वॉल्यूम ग्रोथ के मुख्य इंजन बने हुए हैं।

निवेशकों के लिए चेतावनी

फेस्टिव सीजन के चलते बाजार में रौनक तो है, लेकिन निवेशकों को डीलर्स के पास मौजूद 'इन्वेंट्री लेवल' पर नजर रखनी चाहिए। अगर प्रोडक्शन डिमांड से ज्यादा होता है, तो कंपनियों को स्टॉक क्लियर करने के लिए डिस्काउंट देना पड़ सकता है, जिससे उनके मार्जिन पर दबाव आ सकता है। आने वाले महीनों में कच्चे माल (Raw Material) की लागत को मैनेज करना और सेल्स मोमेंटम को बनाए रखना कंपनियों के अगले नतीजों के लिए सबसे बड़ा टेस्ट होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.