Bain & Co की नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय कार खरीदार अब पुरानी ब्रांड वैल्यू के बजाय एडवांस टेक्नोलॉजी और फीचर्स को ज्यादा अहमियत दे रहे हैं। इस बदलाव से कंपनियों का R&D खर्च बढ़ रहा है, जो उनके प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डाल सकता है।
भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। ग्राहक अब केवल गाड़ी के नाम या पुराने भरोसे पर नहीं, बल्कि उसमें मिलने वाले डिजिटल फीचर्स और स्मार्ट कनेक्टिविटी को देखकर फैसला ले रहे हैं। Bain & Co की रिपोर्ट के अनुसार, खास तौर पर युवा पीढ़ी अब गाड़ी खरीदने से पहले ऑनलाइन रिसर्च और फीचर्स की तुलना पर ज्यादा जोर देती है।
कंपनियों पर बढ़ रहा खर्च का दबाव
इस बदलते माहौल के चलते Tata Motors, Mahindra & Mahindra और Maruti Suzuki जैसी दिग्गज कंपनियों को अपनी स्ट्रैटेजी बदलनी पड़ रही है। अब सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ड्राइवर-असिस्टेंस सिस्टम जैसी सुविधाएं लग्जरी कारों से निकलकर मिड-मार्केट सेगमेंट का हिस्सा बन रही हैं। हालांकि, इन तकनीकों को विकसित करने के लिए कंपनियों को रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) में भारी पैसा खर्च करना पड़ रहा है, जिससे भविष्य में उनके मुनाफे पर चोट पड़ने का डर है।
इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेगमेंट का 'ट्रायल' गणित
रिपोर्ट के डेटा के अनुसार, EV सेगमेंट में एक दिलचस्प ट्रेंड दिखा है। जिन लोगों ने इलेक्ट्रिक कार की टेस्ट-ड्राइव ली, उनमें से 82% ने इसे खरीदने की इच्छा जताई, जबकि बिना टेस्ट-ड्राइव वाले लोगों में यह आंकड़ा महज 66% था। यह साबित करता है कि कंपनियों के लिए ऑनलाइन इंक्वायरी को फिजिकल टेस्ट-ड्राइव में बदलना ही बिक्री की असली कुंजी है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
निवेशकों को अब यह देखना होगा कि क्या कंपनियां इन नए फीचर्स के जरिए कारों की कीमत बढ़ाकर अपना मार्जिन बचा पाती हैं या फिर बढ़ता प्रोडक्शन कॉस्ट उनके पोर्टफोलियो पर भारी पड़ता है। साथ ही, कारों में बढ़ती सॉफ्टवेयर निर्भरता के साथ साइबर सुरक्षा और तकनीकी खराबी (glitches) जैसे रिस्क भी बढ़ गए हैं, जो ब्रांड वैल्यू के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकते हैं।
