सप्लाई चेन की बाधाओं और कच्चे माल की अस्थिर कीमतों से निपटने के लिए Ather Energy, Ceat, और Lumax Auto जैसी दिग्गज कंपनियां चीन में अपना फिजिकल ऑपरेशन बढ़ा रही हैं।
भारतीय ऑटोमोटिव कंपनियां अब सीधे चीन में अपनी प्रोक्योरमेंट टीमें तैनात कर रही हैं ताकि सप्लाई चेन पर बेहतर नियंत्रण पाया जा सके। कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के बीच, Ather Energy, Ceat, और Lumax Auto Technologies जैसी कंपनियां अपनी स्थानीय सब्सिडियरी बनाकर इस जटिल ग्लोबल माहौल में खुद को ढाल रही हैं। यह कदम विशेष रूप से एल्युमीनियम और कॉपर जैसी कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव को मैनेज करने के लिए उठाया गया है।
चीन की रणनीति और प्रोक्योरमेंट का खेल
इस बदलाव का मुख्य कारण उत्पादन में आने वाली रुकावटों को खत्म करना है। उदाहरण के लिए, Ather Energy इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) मोटर के लिए जरूरी रेयर अर्थ एलिमेंट्स (rare earth elements) की सप्लाई को लेकर अपनी निर्भरता कम करना चाहती है। वहीं, Lumax Auto Technologies, जिसका शेयर ₹1,836 के आसपास ट्रेड कर रहा है, चीन की तकनीक का उपयोग सीधे अपने रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) में कर रही है। Ceat भी अपने ऑपरेटिंग मार्जिन को बचाने के लिए अब चीन में डायरेक्ट सोर्सिंग पर विचार कर रही है।
निवेश का जोखिम और अवसर
डेटा बताते हैं कि फाइनेंशियल ईयर 2026 में भारत के कुल ऑटो कंपोनेंट आयात का करीब 36% हिस्सा चीन से आया, जो पिछले साल 32% था। यह बढ़ती निर्भरता ऑटो सेक्टर को भू-राजनीतिक जोखिमों के प्रति संवेदनशील बनाती है। हालांकि, कंपनियां इस 'China+1' रणनीति के जरिए सप्लाई सिक्योरिटी और मार्जिन को बैलेंस करने की कोशिश कर रही हैं। निवेशकों के लिए अब कंपनियों के भविष्य के मार्जिन ट्रेंड और सरकारी पॉलिसी अपडेट्स पर नजर रखना बेहद जरूरी हो गया है।
