व्यापार समझौते से निर्यात में तेजी की उम्मीद
ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ACMA) ने भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते के फ्रेमवर्क की जमकर तारीफ की है। यह समझौता दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार (Bilateral Trade), मैन्युफैक्चरिंग सहयोग (Manufacturing Cooperation) और सप्लाई चेन (Supply Chain) को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस समझौते का मकसद आपसी लाभ को बढ़ाना है।
निर्माताओं को मिलेंगे खास फायदे
ACMA के प्रेसिडेंट विक्रमापति सिंघानिया ने भारतीय ऑटो कॉम्पोनेंट इंडस्ट्री के लिए कुछ खास फायदों पर जोर दिया। इस फ्रेमवर्क में ऑटोमोटिव पार्ट्स के लिए वरीयता वाले टैरिफ दर कोटा (Preferential Tariff Rate Quotas) शामिल हैं, साथ ही कुछ इनपुट्स पर से सेक्शन 232 टैरिफ (Section 232 Tariffs) को हटाया गया है। इससे निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता (Export Competitiveness) में काफी सुधार होगा और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सहयोग भी गहरा होगा।
एक्सपोर्ट में लगातार बढ़ोतरी
ACMA के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले पांच फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। भारत से अमेरिका को ऑटो कॉम्पोनेंट का एक्सपोर्ट फाइनेंशियल ईयर 2020-21 में $3,561 मिलियन से बढ़कर फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में $6,225 मिलियन हो गया। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के पहले छह महीनों में ही $3,124 मिलियन का एक्सपोर्ट दर्ज किया गया है, जो इस रफ्तार को बनाए रखने का संकेत देता है। वहीं, अमेरिका से भारत को ऑटो कॉम्पोनेंट का एक्सपोर्ट भी बढ़ा है, जो फाइनेंशियल ईयर 2020-21 में $904 मिलियन से बढ़कर फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में $1,505 मिलियन हो गया।
आगे की राह
ACMA अब यह सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है कि ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स को अंतिम समझौते में पूरी तरह से शामिल किया जाए। एसोसिएशन संतुलित बाजार पहुंच (Balanced Market Access) और दीर्घकालिक नीतिगत निश्चितता (Long-term Policy Certainty) की वकालत कर रहा है। ACMA को उम्मीद है कि दोनों सरकारें इस व्यापार फ्रेमवर्क की पूरी क्षमता का लाभ उठाने के लिए रचनात्मक रूप से जुड़ेंगी।