भारत और यूके के बीच हुए नए व्यापार समझौते (Trade Deal) का असर दिखने लगा है। ब्रिटिश लग्जरी कारें अब **₹75 लाख** तक सस्ती हो गई हैं, लेकिन स्कॉच व्हिस्की (Scotch whisky) जैसी इंपोर्टेड शराब के दाम तुरंत कम नहीं होंगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि राज्यों को अपने एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) नियमों में बदलाव के लिए मंजूरी देनी होगी।
लग्जरी कारों की कीमतों में भारी कटौती
भारत-यूके कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) के लागू होते ही ब्रिटिश लग्जरी कार ब्रांड्स की कीमतों में तुरंत कटौती की गई है। जगुआर लैंड रोवर (JLR) ने अपनी यूके-निर्मित मॉडलों की कीमतें कम कर दी हैं, जिसमें Range Rover SV की कीमत ₹75 लाख और Range Rover Sport SV की कीमत ₹40 लाख तक घटाई गई है। लग्जरी कार निर्माता मैकलेरन (McLaren) ने भी इंपोर्टेड वाहनों पर प्राइस कट (Price Cut) का ऐलान किया है।
इंपोर्टेड शराब पर एक्साइज ड्यूटी का पेंच
ऑटोमोबाइल सेक्टर के विपरीत, इंपोर्टेड स्कॉच व्हिस्की (Scotch whisky) और जिन (Gin) की कीमतों पर फिलहाल अनिश्चितता बनी हुई है। इंटरनेशनल स्पिरिट्स एंड वाइन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ISWAI) का कहना है कि रिटेल प्राइस (Retail Price) में कोई भी कमी व्यक्तिगत राज्य एक्साइज डिपार्टमेंट की मंजूरी पर निर्भर करेगी। इस प्रशासनिक प्रक्रिया में 15 से 30 दिन का समय लग सकता है। भारत के शराब बाजार की जटिल टैक्स संरचना (Tax Structure) यहां मुख्य बाधा है, जहां राज्यों के पास उपभोक्ता मूल्य तय करने का अधिकार होता है।
भविष्य की राह और निवेशकों के लिए जानकारी
हालांकि CETA का लक्ष्य अगले दशक में स्कॉच और जिन पर 150% के मौजूदा इंपोर्ट टैरिफ (Import Tariff) को घटाकर 40% करना है, लेकिन तत्काल लाभ सीमित है। क्योंकि राज्य स्तरीय टैक्स (State Levies) फेडरल ड्यूटी के ऊपर जोड़े जाते हैं, कुल टैक्स का बोझ अभी भी ज्यादा है। महाराष्ट्र जैसे राज्यों में, टैक्स फाइनल रिटेल प्राइस का लगभग 60-61% होता है। इंडस्ट्री का अनुमान है कि इंपोर्टर्स (Importers) द्वारा टैरिफ लाभ पूरी तरह से ग्राहकों तक पहुंचाने के बाद भी, शेल्फ प्राइस (Shelf Price) में 12-13% की मामूली कमी आ सकती है।
निवेशकों के लिए, यह ट्रेड डील केंद्रीय सरकारी नीतियों और राज्य-स्तरीय कार्यान्वयन के बीच अंतर को उजागर करती है। ऑटोमोटिव सेक्टर, जिसे सीधे इंपोर्ट ड्यूटी (Import Duty) में कमी का फायदा मिल रहा है, हाई-एंड लग्जरी मॉडल की बिक्री में बढ़ोतरी देख सकता है। हालांकि, शराब उद्योग के लिए, राज्य नियंत्रण के कारण कीमतों में गिरावट की गारंटी न दे पाना मांग वृद्धि के लिए एक बड़ा जोखिम बना हुआ है। कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहलिक बेवेरेज कंपनीज (CIABC) ने कहा है कि कंपनियां अंततः इन ड्यूटी परिवर्तनों के आधार पर अपने मार्जिन (Margin) और मार्केट शेयर (Market Share) का प्रबंधन कैसे करना है, यह तय करेंगी।
निवेशकों को यह ट्रैक करना चाहिए कि क्या राज्य इंपोर्ट ड्यूटी कम होने पर लोकल टैक्स (Local Taxes) बढ़ाकर या लाइसेंसिंग नियमों (Licensing Regulations) को कड़ा करके इन लाभों को बेअसर करते हैं। अगली बड़ी अपडेट विभिन्न राज्य एक्साइज डिपार्टमेंट से आधिकारिक नोटिफिकेशन होगी, जो तय करेगा कि इंपोर्टेड शराब भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कब और कितनी सस्ती होगी।
