'बड़ी कार, ज्यादा टैक्स' का नियम खत्म
यह नया टैक्स नियम कंपनियों द्वारा कर्मचारियों को कार देने के तरीके को पूरी तरह बदल देगा। पहले जहां महंगी गाड़ियों पर कर्मचारियों को ज्यादा टैक्सेबल बेनिफिट मिलता था, वहीं अब ₹2 करोड़ की लग्जरी EV और ₹12 लाख की बेसिक EV, दोनों पर ₹8,000 का समान मंथली बेनिफिट काउंट होगा। इससे 'बड़ी कार, ज्यादा टैक्स' वाला सिस्टम खत्म हो गया है।
लग्जरी EVs की डिमांड बढ़ने के आसार
लग्जरी कार निर्माता कंपनियाँ, जैसे कि बीएमडब्ल्यू ग्रुप इंडिया (BMW Group India) और मर्सिडीज-बेंज इंडिया (Mercedes-Benz India), इस बदलाव को कॉर्पोरेट फ्लीट से लग्जरी EVs की डिमांड बढ़ाने वाला मान रही हैं। एक प्रीमियम EV, जिसमें ड्राइवर का खर्च भी शामिल है, कंपनी को सालाना करीब ₹36 लाख में पड़ सकती है, लेकिन कर्मचारी की टैक्सेबल इनकम में सिर्फ ₹96,000 जुड़ेंगे। यह लग्जरी EVs को सिर्फ इको-फ्रेंडली ऑप्शन की जगह एग्जीक्यूटिव सैलरी पैकेज का एक आकर्षक हिस्सा बनाता है। बीएमडब्ल्यू का कहना है कि इससे सालाना काफी बचत होगी।
कॉर्पोरेट लीजिंग को मिलेगा बढ़ावा
भारत में कॉर्पोरेट कार लीजिंग सिर्फ एक फैसिलिटी नहीं, बल्कि एक स्ट्रैटेजिक फाइनेंशियल मूव बन रही है। लीजिंग से कंपनियाँ कैश फ्लो बेहतर रखती हैं और कर्मचारियों को आकर्षक, टैक्स-फ्रेंडली बेनिफिट्स ऑफर करती हैं। भारत में लीज पर ली जाने वाली गाड़ियों की एवरेज कॉस्ट लगभग दोगुनी होकर ₹17-18 लाख हो गई है, जो महंगी गाड़ियों की ओर बढ़ते रुझान को दर्शाता है। इस नए टैक्स नियम से कॉर्पोरेट लीजिंग में EVs का चलन और तेज होने की उम्मीद है।
EV मार्केट में लग्जरी सेगमेंट की जोरदार ग्रोथ
भारत का EV मार्केट तेजी से बढ़ रहा है, जिसके 2026 तक $31.09 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। इसमें लग्जरी EVs एक बड़ा हिस्सा हैं। जनवरी से मई 2025 तक इनकी सेल्स 66% बढ़ी है, जिससे लग्जरी कार मार्केट में इनका हिस्सा बढ़कर 11% हो गया है (पिछले साल यह 7% था)। मर्सिडीज-बेंज इंडिया की EV सेल्स 73% बढ़ी है, वहीं बीएमडब्ल्यू ग्रुप इंडिया ने 110% की ग्रोथ दर्ज की है।
चुनौतियाँ भी बरकरार
हालांकि, कुछ चुनौतियाँ भी हैं। भारत में लग्जरी कार लीजिंग का मार्केट अभी शुरुआती दौर में है। साथ ही, लग्जरी EVs के लिए कंपनियों को बेसिक मॉडल्स की तुलना में काफी ज्यादा अपफ्रंट इन्वेस्टमेंट करना होगा। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, खासकर बड़े शहरों के बाहर, और ग्लोबल सप्लाई चेन प्रॉब्लम्स व करेंसी फ्लक्चुएशन्स जैसी दिक्कतें भी बनी हुई हैं।
टैक्स इंसेंटिव से EV को बढ़ावा
यह टैक्स रिफॉर्म कंपनियों द्वारा लीज पर ली जाने वाली प्रीमियम इलेक्ट्रिक गाड़ियों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने का एक बड़ा कदम है। सरकार डायरेक्ट सब्सिडी की बजाय टैक्स इंसेंटिव का इस्तेमाल करके EV को अपनाने को प्रोत्साहित कर रही है। इंडस्ट्री को उम्मीद है कि इससे EV, खासकर प्रीमियम सेगमेंट में, तेजी से अपनाई जाएंगी।