2026 ASDC कॉन्क्लेव में भारी उद्योग मंत्री HD कुमारस्वामी ने ऑटो सेक्टर को ग्लोबल लेवल पर स्किल्ड प्रोफेशनल्स की सप्लाई करने पर जोर दिया है। इलेक्ट्रिक व्हीकल सेगमेंट में बढ़ती मांग के बीच टैलेंट की भारी कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, जिसे दूर करने के लिए सरकार अब नई ट्रेनिंग पहल शुरू कर रही है।
ग्लोबल मार्केट में भारत की नई भूमिका
केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय अब भारतीय ऑटो सेक्टर को एक नई दिशा देने की तैयारी में है। नई दिल्ली में 31 अगस्त, 2026 को आयोजित Automotive Skills Development Council (ASDC) के सालाना कॉन्क्लेव में मंत्री HD कुमारस्वामी ने साफ कहा कि अब वक्त आ गया है कि भारत केवल मैन्युफैक्चरिंग हब न रहे, बल्कि दुनिया को स्किल्ड वर्कफोर्स एक्सपोर्ट करने वाला बड़ा केंद्र बने।
क्यों है ये बदलाव जरूरी?
ऑटो सेक्टर इस वक्त बड़े ट्रांजिशन से गुजर रहा है। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और स्मार्ट कनेक्टेड गाड़ियों के दौर में खास तरह की स्किल्स की मांग बढ़ गई है। इंडस्ट्री डेटा के अनुसार, साल 2025 में करीब 80% ऑटोमोटिव एम्प्लॉयर्स को स्किल्ड प्रोफेशनल्स ढूंढने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। यह कमी सिर्फ हायरिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रोडक्शन टारगेट्स और भविष्य के विस्तार के लिए एक बड़ा रिस्क बन चुकी है।
सरकार का पायलट प्रोजेक्ट
सरकार अब इंडियन यूथ को इंटरनेशनल स्टैंडर्ड्स के हिसाब से तैयार कर रही है। इसी के तहत रोमानिया में एक पायलट प्रोग्राम शुरू किया गया है, जहां भारतीय युवाओं को जॉब्स पर रखा गया है। यह प्रोजेक्ट इस बात का सबूत है कि भारतीय टैलेंट ग्लोबल मार्केट में भी अपनी धाक जमा सकता है।
'स्किल गैप' और इंडस्ट्री की चिंता
ASDC ने वित्त वर्ष 2025-26 में 5,00,000 से ज्यादा लर्नर्स को ट्रेनिंग दी है और 1,53,000 प्रोफेशनल असेसमेंट किए हैं। हालांकि, इसके बावजूद इंडस्ट्री का मानना है कि मौजूदा सर्टिफिकेशन मॉडर्न फैक्ट्री फ्लोर की जरूरतों को पूरी तरह पूरा नहीं कर पा रहे हैं। इंडस्ट्री 4.0, रोबोटिक्स, और बैटरी मैनेजमेंट जैसे हाई-टेक क्षेत्रों में प्रैक्टिकल नॉलेज की कमी एक बड़ा मुद्दा बनी हुई है।
आगे का रास्ता
इन समस्याओं से निपटने के लिए ASDC ने सरकार के सामने 'नेशनल ऑटोमोटिव स्किल मिशन' और 'ऑटोमोटिव फ्यूचर स्किल्स फंड' का प्रस्ताव रखा है। आने वाले समय में इन इनिशिएटिव्स की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ऑटो कंपनियां कितनी तेजी से अपनी वर्कफोर्स को तैयार कर पाती हैं ताकि इलेक्ट्रिक व्हीकल ट्रांजिशन में कोई रुकावट न आए।
