India Auto Sector: सरकार का बड़ा एक्शन! EV की ओर बढ़ेगा ऑटो, वेस्ट एशिया सप्लाई पर कसी नकेल

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
India Auto Sector: सरकार का बड़ा एक्शन! EV की ओर बढ़ेगा ऑटो, वेस्ट एशिया सप्लाई पर कसी नकेल
Overview

नई दिल्ली भारत के ऑटोमोटिव सेक्टर को फैक्ट्री ऑपरेशन्स के लिए तेल से इलेक्ट्रिक पावर की ओर तेजी से बढ़ने का दबाव बना रही है। वेस्ट एशिया से सप्लाई चेन में आ रही दिक्कतों के चलते, मिनिस्ट्री ऑफ हैवी इंडस्ट्रीज ने कंपनियों को एनर्जी-एफिशिएंट तरीके अपनाने, प्रोडक्शन को ऑप्टिमाइज़ करने और एच.डी.पी.ई. (HDPE) व यू.एच.एस.एस. (UHSS) जैसे वैकल्पिक मटेरियल तलाशने की सलाह दी है। इसका मकसद सेक्टर को जियोपॉलिटिकल झटकों और संसाधनों की कमी से बचाना है।

सरकार का बड़ा फरमान: ईवी की ओर बढ़ाओ कदम!

मिनिस्ट्री ऑफ हैवी इंडस्ट्रीज (MHI) ने घरेलू ऑटो इंडस्ट्री से तेल-आधारित ईंधन से दूर, जहां टेक्निकली संभव हो, बिजली पर आधारित फैक्ट्री ऑपरेशन्स को तेजी से अपनाने का आग्रह किया है। यह डायरेक्टिव सरकार के इंडस्ट्रियल सेक्टर में एनर्जी एफिशिएंसी बढ़ाने के लक्ष्य के तहत आया है, खासकर वेस्ट एशिया में जारी जियोपॉलिटिकल टेंशन के कारण एनर्जी सप्लाई पर पड़ रहे असर को देखते हुए।

प्रोडक्शन को बेहतर बनाएं, बर्बादी घटाएं

एनर्जी सोर्स के अलावा, मंत्रालय ने प्रोडक्शन शेड्यूल्स को ऑप्टिमाइज़ करने पर जोर दिया है ताकि आइडल और स्टैंडबाय पीरियड्स के दौरान फ्यूल कंजम्पशन को कम किया जा सके। इसका मकसद नॉन-प्रोडक्टिव मशीन रनटाइम से होने वाली एनर्जी की बर्बादी को रोकना और मैन्युफैक्चरिंग एफिशिएंसी को बढ़ाना है। इन ऑपरेशनल बदलावों का लक्ष्य सप्लाई में आने वाली संभावित दिक्कतों के खिलाफ सेक्टर को और मजबूत बनाना है।

सप्लाई चेन की मजबूती के लिए वैकल्पिक मटेरियल

कच्चे माल की उपलब्धता, खासकर एल्युमीनियम को लेकर चिंताएं भी दूर की गईं। कंपनियों को जहां संभव हो, रीसाइकल्ड एल्युमीनियम का उपयोग करने के लिए कहा गया है। यह सलाह नॉन-क्रिटिकल एरियाज में मटेरियल के इस्तेमाल में विविधता लाने का भी सुझाव देती है। इसमें हाई-डेंसिटी पॉलीएथिलीन (HDPE), अनप्लास्टिसाइज्ड पॉलीविनाइल क्लोराइड (uPVC), अल्ट्रा हाई स्ट्रेंथ स्टील (UHSS), और ग्लास फाइबर रीइन्फोर्स्ड पॉलीमर (GFRP) कंपोजिट जैसे विकल्पों की जांच शामिल है। इन सब्स्टीच्यूशन का उद्देश्य मौजूदा शॉर्टेज के दौरान एल्युमीनियम पर डिमांड प्रेशर को कम करना है, बशर्ते कि एंड-प्रोडक्ट परफॉर्मेंस प्रभावित न हो।

इंडस्ट्री के लिए एक रणनीतिक नज़रिया

ऑटो इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि यह सलाह सेक्टर को जियोपॉलिटिकल डिस्टर्बेंस से बचाने के लिए सरकार का एक सोची-समझी कोशिश है। यह एनर्जी-एफिशिएंट और रिसोर्स-ऑप्टिमाइज्ड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेस की ओर एक मजबूत धक्का है, जो इंडस्ट्री को व्यापक राष्ट्रीय एनर्जी सिक्योरिटी और सस्टेनेबिलिटी गोल्स के साथ संरेखित करता है।

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