सरकार ने पेट्रोल के भारी-भरकम **₹22 लाख करोड़** के इम्पोर्ट बिल को कम करने के लिए अब 100% इथेनॉल से चलने वाले इंजनों पर जोर देना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही **₹57,000 करोड़** की PM e-Bus Sewa योजना के तहत **10,000** इलेक्ट्रिक बसें भी सड़कों पर उतरेंगी।
भारत सरकार अब वर्तमान E20 पेट्रोल-इथेनॉल ब्लेंड से आगे बढ़कर 100% इथेनॉल (E100) से चलने वाले फ्लेक्स-फ्यूल इंजनों के विकास पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इसका मुख्य उद्देश्य देश के भारी-भरकम ₹22 लाख करोड़ के पेट्रोलियम इम्पोर्ट बिल में कटौती करना है। सरकार कृषि क्षेत्र को ऊर्जा के मुख्य स्रोत के रूप में विकसित करना चाहती है, जिससे मक्का जैसी फसलों की मांग और कीमतों में तेजी देखी जा रही है।
ऑटो कंपनियों के लिए चुनौतियां
100% इथेनॉल पर शिफ्ट होना ऑटो मेकर्स के लिए तकनीकी तौर पर बड़ी चुनौती है। इथेनॉल की एनर्जी डेंसिटी पेट्रोल से कम होती है, जिससे माइलेज पर असर पड़ सकता है। साथ ही, यह रबर और मेटल के पुर्जों को नुकसान पहुंचा सकता है। इन दिक्कतों को दूर करने के लिए ऑटो कंपनियों को फ्यूल-रेसिस्टेंट सील्स और खास फ्यूल इंजेक्टर्स जैसे हार्डवेयर में निवेश करना होगा। निवेशकों के लिए देखने वाली बात यह होगी कि इन इंजीनियरिंग लागतों का कंपनी के मार्जिन्स पर क्या असर पड़ता है और सरकार इसके लिए क्या इन्सेंटिव देती है।
पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर सरकार का जोर
सरकार निजी वाहनों के साथ-साथ पब्लिक ट्रांसपोर्ट को भी सुधार रही है। ₹57,000 करोड़ के बजट वाली 'PM e-Bus Sewa' योजना का लक्ष्य 10,000 इलेक्ट्रिक बसें तैनात करना है। अनुमान है कि यह सेवा पारंपरिक डीजल बसों के मुकाबले 30% तक सस्ती होगी।
भविष्य की रणनीति
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटो मार्केट बन चुका है। इथेनॉल के अलावा सरकार हाइड्रोजन गाड़ियां, इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर और वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर रही है। नागपुर में कचरे से 28 टन ईंधन बनाने का मॉडल सफल रहा है, जिसे सरकार देशभर के 4,000 साइट्स पर लागू करने की योजना बना रही है। हालांकि, इन सभी योजनाओं की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इथेनॉल और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर कितनी तेजी से तैयार होता है।
