भारत सरकार ने CAFE-III के ड्राफ्ट नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब कार निर्माता स्टार्ट-स्टॉप सिस्टम और रीजनरेटिव ब्रेकिंग जैसी फ्यूल-सेविंग टेक्नोलॉजी पर कंप्लायंस क्रेडिट्स (Compliance Credits) कमा सकेंगे। इससे कंपनियों को इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) प्रोडक्शन पर पूरी तरह निर्भर हुए बिना कड़े एमिशन टारगेट्स को पूरा करने में मदद मिलेगी, जिससे आम बाजार के वाहनों की लागत कम हो सकती है।
नई टेक्नोलॉजी पर रेगुलेटरी क्रेडिट्स
प्रस्तावित नियमों के तहत, ऑटोमोबाइल कंपनियां अब फ्यूल एफिशिएंसी (Fuel Efficiency) बढ़ाने वाली टेक्नोलॉजी अपनाने पर क्रेडिट्स हासिल कर सकती हैं। इनमें ऑटोमेटिक स्टार्ट-स्टॉप सिस्टम (जो गाड़ी रुकने पर इंजन बंद कर देता है), टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम, एडवांस ट्रांसमिशन और रीजनरेटिव ब्रेकिंग जैसी टेक्नोलॉजी शामिल हैं। इन मंजूरशुदा टेक्नोलॉजी से प्रति वाहन प्रति किलोमीटर 1 ग्राम CO2 उत्सर्जन में कमी के बराबर क्रेडिट मिलेगा। इस फ्रेमवर्क के तहत प्रति वाहन 9 ग्राम CO2 प्रति किलोमीटर क्रेडिट की कैप (Cap) रखी गई है, जिससे लगभग 0.3795 लीटर प्रति 100 किलोमीटर तक फ्यूल कंजम्पशन (Fuel Consumption) में सुधार होगा।
कार निर्माताओं के लिए स्ट्रैटेजिक बदलाव
पहले, कंपनियों को फ्लीट-वाइड एमिशन (Fleet-wide Emission) कम करने के लिए या तो आक्रामक विद्युतीकरण (Electrification) की ओर बढ़ना पड़ता था या फिर इंजन में बड़े बदलाव करने पड़ते थे। लेकिन, इस नए प्रस्ताव से कंपनियां अब सुविधा या सुरक्षा फीचर्स (Convenience or Safety Features) को भी अपने आधिकारिक पर्यावरण अनुपालन (Environmental Compliance) में गिन सकेंगी। इससे कंपनियों को फुल-स्केल इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) या स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड (Strong Hybrid) डेवलपमेंट के लिए भारी कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) के बजाय, अधिक सुलभ टेक्नोलॉजी अपग्रेड के माध्यम से अपने फ्लीट एमिशन को कम करने में मदद मिलेगी।
मास-मार्केट सेगमेंट पर असर
भारतीय निवेशकों के लिए यह रेगुलेटरी बदलाव महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे इंटरनल कम्बशन इंजन (Internal Combustion Engine) वाले ज्यादा वाहनों वाली कंपनियों के लिए कंप्लायंस की लागत कम हो सकती है। मास-मार्केट मॉडल में स्टार्ट-स्टॉप सिस्टम या एडवांस ट्रांसमिशन लागू करना, नए इलेक्ट्रिक प्लेटफॉर्म विकसित करने की तुलना में आमतौर पर अधिक लागत प्रभावी होता है। इस प्रस्ताव में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (Flex-fuel Vehicles) के लिए भी इंसेंटिव (Incentive) शामिल हैं, जो उन निर्माताओं को और फायदा पहुंचा सकते हैं जो वर्तमान में अल्टरनेटिव फ्यूल इंजन (Alternative Fuel Engines) में निवेश कर रहे हैं।
संभावित जोखिम और निगरानी
कंपनियों के लिए अंतिम वित्तीय लाभ नियमों के अंतिम संस्करण और प्रोडक्शन लाइनों पर इन टेक्नोलॉजी को लागू करने की लागत पर निर्भर करेगा। हालांकि क्रेडिट्स कंप्लायंस का रास्ता देते हैं, लेकिन वे जीरो-एमिशन व्हीकल्स (Zero-Emission Vehicles) की ओर इंडस्ट्री के दीर्घकालिक बदलाव की जगह नहीं लेते। निवेशकों को यह ट्रैक करने की आवश्यकता हो सकती है कि निर्माता इन विशिष्ट फीचर्स को अपने मास-मार्केट पोर्टफोलियो में कितनी तेजी से एकीकृत करते हैं और क्या ये क्रेडिट्स EV इंफ्रास्ट्रक्चर (EV Infrastructure) पर बड़े खर्च की आवश्यकता को प्रभावी ढंग से कम करते हैं। अगली अपडेट के लिए मिनिस्ट्री ऑफ पावर (Ministry of Power) द्वारा CAFE-III नॉर्म्स की अंतिम अधिसूचना का इंतजार करना होगा, जो योग्य टेक्नोलॉजी की विशिष्ट सूची और क्रेडिट एक्युमुलेशन (Credit Accumulation) की अंतिम कैप की पुष्टि करेगी।
