इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर को बड़ी राहत देते हुए सरकार **₹12,000 करोड़** का इंसेंटिव पैकेज लाने की तैयारी में है। इसका मकसद बैटरी के जरूरी पार्ट्स का देश में ही निर्माण करना है ताकि चीन पर निर्भरता कम हो सके।
भारत सरकार देश के इलेक्ट्रिक व्हीकल और एनर्जी स्टोरेज इकोसिस्टम को मजबूती देने के लिए ₹12,000 करोड़ का एक नया इंसेंटिव पैकेज तैयार कर रही है। इस योजना का मुख्य जोर पांच प्रमुख बैटरी घटकों—एनोड, कैथोड, इलेक्ट्रोलाइट्स, सेपरेटर और कॉपर फॉयल—के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है। सरकार की कोशिश एक ऐसा आत्मनिर्भर सप्लाई चेन बनाने की है, जो फिलहाल काफी हद तक चीन जैसे देशों से होने वाले इंपोर्ट पर टिका है।\n\n### निवेश और रणनीति में बदलाव\n\nनिवेशकों के नजरिए से यह सरकार की इंडस्ट्रियल स्ट्रेटजी में बड़ा बदलाव है। अब तक की पॉलिसीज केवल बैटरी सेल असेंबली पर केंद्रित थीं, लेकिन अब सरकार 'डीपर मैन्युफैक्चरिंग' यानी कोर कंपोनेंट्स पर दांव लगा रही है। इससे उन कंपनियों को बड़ा फायदा होने की उम्मीद है जो अब तक रॉ मटेरियल की कमी और सप्लाई चेन की बाधाओं से जूझ रही थीं। इस लिस्ट में Reliance Industries, Ola Electric, Tata Group (Agratas), Exide Industries और Amara Raja Energy & Mobility जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं।\n\n### चुनौतियां और मुनाफा\n\nहालाँकि, राह आसान नहीं है। वर्तमान में भारत में बनी बैटरी सेल, विदेशी सेल के मुकाबले 15% तक महंगी हैं। स्थानीय सप्लायर्स का इकोसिस्टम अभी पूरी तरह विकसित नहीं है, जिससे शुरुआती दौर में कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव रह सकता है। इसके अलावा, एडवांस्ड टेक्नोलॉजी हासिल करना भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।\n\nनिवेशकों को अब सरकार के फाइनल पॉलिसी फ्रेमवर्क का इंतजार है। Exide Industries और Amara Raja Energy & Mobility जैसे स्टॉक्स के लिए यह सब्सिडी 'गेम चेंजर' साबित हो सकती है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि कंपनियां अपनी प्रोडक्शन टाइमलाइन और कॉस्ट गैप को कैसे मैनेज करती हैं।
