सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवेज एक नया 'ग्रेडेड पेनल्टी पॉइंट्स सिस्टम' तैयार कर रही है। इसके तहत बार-बार नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी, जबकि सुरक्षित ड्राइविंग करने वालों को बीमा (Insurance) पर मिल सकते हैं खास ऑफर्स।
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 66th SIAM एनुअल कन्वेंशन 2026 में इस बड़े बदलाव की घोषणा की है। इस नए सिस्टम का मुख्य उद्देश्य ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों पर रियल-टाइम नजर रखना और उन पर कड़ी लगाम कसना है।
कैसे काम करेगा यह सिस्टम?
प्रस्तावित ढांचे के तहत, हर बार ट्रैफिक नियम तोड़ने पर ड्राइवर के खाते में कुछ 'पॉइंट्स' जुड़ते जाएंगे। यदि ये पॉइंट्स एक तय सीमा को पार कर जाते हैं, तो सिस्टम ऑटोमैटिक एक्शन लेगा। इसमें लाइसेंस का सस्पेंशन या उसे स्थायी रूप से रद्द करने तक की सजा शामिल हो सकती है। यह डेटा-ड्रिवन अप्रोच भारत की ट्रैफिक पुलिसिंग में एक बड़ा डिजिटल बदलाव लाने वाली है।
इंश्योरेंस सेक्टर पर असर
यह पॉलिसी मोटर इंश्योरेंस के पूरे गणित को बदल सकती है। अगर ड्राइविंग हिस्ट्री और पेनल्टी पॉइंट्स सेंट्रल डेटाबेस से जुड़ जाते हैं, तो बीमा कंपनियां ग्राहकों के 'रिस्क प्रोफाइल' को समझकर उनके लिए 'बिहेवियर-बेस्ड' प्रीमियम तय कर सकेंगी। फिलहाल, प्रीमियम का गणित केवल गाड़ी की कीमत और लोकेशन पर टिका है, लेकिन भविष्य में सुरक्षित ड्राइविंग करने वालों को कम प्रीमियम का बड़ा फायदा मिल सकता है।
चुनौतियां और भविष्य की राह
इस योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि राज्य और केंद्र सरकारें अपने डेटाबेस को कितनी तेजी से आपस में जोड़ती हैं। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की एकरूपता इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। फिलहाल सरकार ने इसे लागू करने की कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं की है, लेकिन ऑटोमोबाइल और इंश्योरेंस सेक्टर की निगाहें अब सरकारी नोटिफिकेशन पर टिकी हैं।
इसके अलावा, मंत्रालय अक्टूबर 2027 तक Bharat NCAP 2.0 लॉन्च करने और BS-IV गाड़ियों के लिए किफायती एमिशन-कंट्रोल डिवाइस की टेस्टिंग पर भी काम कर रहा है।
