ICRA की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत में पैसेंजर व्हीकल की ग्रोथ FY27 में धीमी होकर **4-6%** रह सकती है। पहली छमाही में **28%** की उछाल के बाद अब निवेशकों की नजर बढ़ती इनपुट कॉस्ट और डीलरों के पास जमा स्टॉक पर है।
ग्रोथ में क्यों आएगी कमी?
रेटिंग एजेंसी ICRA के मुताबिक, चालू फाइनेंशियल ईयर में होलसेल ग्रोथ 4% से 6% के बीच रहने की उम्मीद है। गौर करने वाली बात यह है कि पहली छमाही में यह आंकड़ा 28% पर था, लेकिन अब हाई बेस इफेक्ट की वजह से ग्रोथ मोमेंटम को बरकरार रखना कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती साबित होगा।
इन्वेंट्री का दबाव
सितंबर के अंत तक डीलरों के पास इन्वेंट्री का स्तर बढ़कर 43 से 45 दिनों तक पहुंच गया है। हालांकि त्योहारी सीजन के मद्देनजर स्टॉक जमा करना एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन इतनी बड़ी मात्रा में स्टॉक का होना कंपनियों के लिए चिंता का विषय है। अगर रिटेल डिमांड में सुधार नहीं हुआ, तो कंपनियों को स्टॉक क्लियर करने के लिए भारी डिस्काउंट देने पड़ सकते हैं, जिसका सीधा असर उनके प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ेगा।
बाजार के अन्य आंकड़े
- यूटिलिटी व्हीकल: पहली छमाही में कुल वॉल्यूम में 68% हिस्सेदारी के साथ ये सेगमेंट बाजार का किंग बना हुआ है।
- इलेक्ट्रिक व्हीकल: EV सेगमेंट में अच्छी प्रगति देखी जा रही है, जिसकी मार्केट पैठ पिछले फाइनेंशियल ईयर के 4.2% से बढ़कर FY27 की पहली छमाही में 7.5% हो गई है।
चुनौतियां अभी बरकरार
Maruti Suzuki India और Hyundai Motor India जैसी दिग्गज कंपनियां बढ़ती इनपुट कॉस्ट को देखते हुए पहले ही कीमतों में इजाफा कर चुकी हैं। इसके अलावा, मानसून के अनिश्चित पैटर्न का सीधा असर ग्रामीण मांग पर पड़ रहा है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि कंपनियां इन दबावों के बीच अपने ऑपरेटिंग मार्जिन को कैसे सुरक्षित रखती हैं और आने वाली तिमाही में रिटेल डिमांड का क्या रुख रहता है।
