UK कारें अब भारत में होंगी सस्ती! 9,316 यूनिट्स के लिए खुला इंपोर्ट कोटे का आवेदन

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
UK कारें अब भारत में होंगी सस्ती! 9,316 यूनिट्स के लिए खुला इंपोर्ट कोटे का आवेदन

भारत सरकार ने इंडिया-यूके (India-UK) ट्रेड एग्रीमेंट के तहत यूके (UK) से कारें इंपोर्ट करने के लिए आवेदन विंडो खोल दी है। यह कोटा 2026 के लिए है, जिसमें **9,316** गाड़ियां कम कस्टम ड्यूटी परImport की जा सकेंगी।

Detailed Coverage

इंपोर्ट कोटे का हुआ ऐलान

भारत सरकार ने इंडिया-यूके (India-UK) कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) के तहत यूके (UK) से गाड़ियां इंपोर्ट करने के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। 21 जुलाई, 2026 से 4 अगस्त, 2026 तक योग्य इंपोर्टर्स 'टैरिफ रेट कोटा' के लिए अप्लाई कर सकते हैं। इससे इन गाड़ियों पर कस्टम ड्यूटी (Customs Duty) काफी कम लगेगी। यह पहल दोनों देशों के बीच ऑटोमोटिव सेक्टर में व्यापार को आसान बनाने के लिए की गई है।

इंपोर्ट का पूरा हिसाब

साल 2026 के लिए कुल 9,316 गाड़ियों का कोटा तय किया गया है, जिसे अलग-अलग सेगमेंट में बांटा गया है:

  • 2,329 यूनिट्स: 1,500cc इंजन क्षमता तक की पैसेंजर कारें।
  • 2,329 यूनिट्स: मिड-सेगमेंट गाड़ियां।
  • 4,658 यूनिट्स: हाई-कैपेसिटी या प्रीमियम पैसेंजर कारें। प्रीमियम सेगमेंट की इन कारों पर 30% की घटाई हुई कस्टम ड्यूटी लगेगी।
  • इसके अलावा, पूरी तरह से बनी हुई गुड्स ट्रांसपोर्ट व्हीकल्स (Goods Transport Vehicles) के लिए भी अलग से कोटा रखा गया है।

इंपोर्टर्स के लिए जरूरी नियम

डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ने इंपोर्टर्स के लिए कुछ खास नियम बनाए हैं। इंपोर्टर्स को यूके (UK) स्थित ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर (OEM) से एक प्री-परचेज एग्रीमेंट (Pre-purchase Agreement) दिखाना होगा। इस कॉन्ट्रैक्ट में 2026 कैलेंडर ईयर में इंपोर्ट होने वाली गाड़ियों की संख्या साफ लिखी होनी चाहिए। सभी लेन-देन फॉरेन ट्रेड पॉलिसी 2023 के तहत होने चाहिए। CETA के तहत सालाना 20,000 गाड़ियों तक इंपोर्ट की जा सकती हैं, लेकिन यह पहला चरण है।

निवेशकों के लिए क्या है खास?

इन्वेस्टर्स (Investors) को इस बात पर नजर रखनी होगी कि यह प्रीमियम इंपोर्टेड गाड़ियां भारतीय लग्जरी कार मार्केट में क्या असर डालती हैं। जिन घरेलू कंपनियों का फोकस प्रीमियम सेगमेंट्स पर है, उन्हें इन नई इंपोर्टेड कारों से बढ़ी हुई प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है। इंपोर्टर्स इन दो हफ्तों की विंडो में कितना सफल होते हैं और इन विदेशी कारों की कितनी डिमांड रहती है, यह भी ट्रेड एग्रीमेंट के असर को बताएगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.