Electric Commercial Vehicles: भारत में इलेक्ट्रिक कमर्शियल गाड़ियों की धूम, मार्केट शेयर **5.18%** पर पहुंचा

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AuthorAditya Rao|Published at:
Electric Commercial Vehicles: भारत में इलेक्ट्रिक कमर्शियल गाड़ियों की धूम, मार्केट शेयर **5.18%** पर पहुंचा

भारत में इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहनों (e-CV) के लिए अगस्त **2026** एक रिकॉर्ड मंथ रहा है, जिसमें मार्केट शेयर बढ़कर **5.18%** के नए शिखर पर पहुंच गया है। फ्लीट ऑपरेटरों की बढ़ती मांग और बड़े ऑर्डर्स ने इस ग्रोथ को रफ्तार दी है।

ऑटोमोबाइल डीलर्स की संस्था FADA के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में कुल रिटेल बिक्री साल-दर-साल 14.45% बढ़कर 90,769 यूनिट्स पर रही। हालांकि जुलाई के मुकाबले इसमें 8.93% की मामूली गिरावट आई है, लेकिन इलेक्ट्रिक सेगमेंट का प्रदर्शन काफी उत्साहजनक है।

अब सिर्फ पायलट प्रोजेक्ट नहीं, बड़े फ्लीट ऑर्डर्स

इलेक्ट्रिक वाहनों की ग्रोथ अब छोटे लास्ट-माइल डिलीवरी वैन तक सीमित नहीं है। अब लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट कंपनियां बड़े पैमाने पर फ्लीट खरीद रही हैं, जो इस बात का संकेत है कि उन्हें इलेक्ट्रिक ट्रकों और बसों की कमर्शियल वायबिलिटी (Commercial Viability) पर भरोसा हो गया है। खास बात यह है कि भारी-भरकम ट्रकों में भी इलेक्ट्रिक पेनिट्रेशन 3.6% तक पहुंच गया है, जो जुलाई में 1% से भी कम था।

डीजल की बादशाहत और चुनौतियां

इलेक्ट्रिक गाड़ियों की रफ्तार तेज है, लेकिन भारतीय सड़कों पर अभी भी डीजल का राज है। अगस्त में कुल मार्केट में 78.77% हिस्सेदारी के साथ डीजल सबसे आगे है।

इन्वेस्टर्स को इस सेक्टर में निवेश करते समय इन रिस्क पर नजर रखनी चाहिए:

  • हाई फ्रंट-एंड कॉस्ट: इलेक्ट्रिक ट्रकों की शुरुआती कीमत अभी भी बहुत अधिक है।
  • इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी: खासतौर पर हैवी-ड्यूटी ट्रकों के लिए फास्ट-चार्जिंग नेटवर्क की भारी कमी है।
  • सब्सिडी पर निर्भरता: PM E-DRIVE जैसे सरकारी प्रोग्राम्स के बिना आर्थिक मजबूती हासिल करना बड़ी चुनौती है।
  • रीसेल वैल्यू: डीजल ट्रकों के मुकाबले इलेक्ट्रिक कमर्शियल गाड़ियों की बैटरी हेल्थ और भविष्य में मिलने वाली रीसेल वैल्यू को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है।
Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.