भारत में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की बिक्री ने जुलाई में 173,294 यूनिट्स का आंकड़ा पार कर लिया है, जो पिछले साल के मुकाबले 68% की बड़ी बढ़ोतरी है। TVS Motor ने 27.3% मार्केट शेयर के साथ अपनी पहली पोजिशन बरकरार रखी है, जबकि Bajaj Auto और Ather Energy क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। जून में प्रमोशनल स्कीम्स खत्म होने के बाद महीने-दर-महीने थोड़ी गिरावट देखी गई, लेकिन सेक्टर के लिए लंबी अवधि के ग्रोथ के संकेत मजबूत बने हुए हैं।
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की बिक्री में तूफानी तेजी
सरकारी Vahan पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में भारत में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की कुल 173,294 यूनिट्स रजिस्टर्ड हुईं। यह जुलाई 2025 की तुलना में 68% की जबरदस्त बढ़ोतरी दिखाता है। हालांकि, जून 2026 के 194,300 यूनिट्स के मुकाबले यह 11% की गिरावट है। ऐसा माना जा रहा है कि पिछले महीने डिमांड को बढ़ाने वाली आक्रामक प्रमोशनल स्कीम्स और डिस्काउंट्स के खत्म होने का असर इस महीने की बिक्री पर पड़ा है।
TVS Motor का जलवा बरकरार
TVS Motor Company ने अपनी टॉप पोजिशन मजबूत की है। जुलाई में कंपनी ने 47,242 यूनिट्स की बिक्री की, जिससे उसका मार्केट शेयर बढ़कर 27.3% हो गया, जो जून में 24.3% था। बाजार में आई गिरावट के बावजूद कंपनी का यह प्रदर्शन इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में उसकी बढ़ती पकड़ को दर्शाता है।
Bajaj Auto और Ather Energy की पोजिशन
Bajaj Auto दूसरे और Ather Energy तीसरे स्थान पर रहे। Bajaj Auto ने 38,974 यूनिट्स की बिक्री के साथ 22.5% मार्केट शेयर हासिल किया, जबकि Ather Energy ने 25,907 यूनिट्स बेचकर 14.9% मार्केट शेयर पर कब्जा किया। Hero MotoCorp ने अपने Vida ब्रांड के जरिए 18,611 यूनिट्स बेचकर 10.7% शेयर हासिल किया।
Ola Electric की मुश्किल बढ़ी
Ola Electric को मार्केट शेयर में दबाव का सामना करना पड़ा है। जुलाई में कंपनी ने 11,880 यूनिट्स रजिस्टर कीं, जिससे उसका मार्केट शेयर घटकर 6.9% रह गया, जो जून में 8.3% था। यह गिरावट इसलिए भी अहम है क्योंकि पहले Ola Electric इस सेक्टर में 18.6% (जुलाई 2025 में) तक का मार्केट शेयर रखती थी। हालांकि, वर्तमान बिक्री के आंकड़े 2026 की शुरुआत के निचले स्तर से बेहतर हैं, जो कुछ स्थिरता का संकेत देते हैं।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि त्योहारी सीजन के नजदीक आने पर डिमांड कितनी स्थिर होती है। इंडस्ट्री में अक्सर त्योहारी सीजन के दौरान बिक्री बढ़ाने के लिए प्रमोशन्स का सहारा लिया जाता है। जिन कंपनियों के पास बेहतर कॉस्ट स्ट्रक्चर और स्थापित सर्विस नेटवर्क हैं, वे प्रमोशनल साइकल्स के दौरान मार्जिन प्रेशर को बेहतर ढंग से झेल पाएंगी। सेक्टर में सालाना ग्रोथ मजबूत दिख रही है, लेकिन मासिक आंकड़ों में उतार-चढ़ाव यह बताता है कि रिटेल डिमांड प्राइसिंग स्ट्रैटेजी और सरकारी नीतियों पर काफी निर्भर करती है। निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनियां घटती-बढ़ती डिमांड के दौरान प्रोडक्शन कॉस्ट और इन्वेंटरी लेवल को कैसे मैनेज करती हैं, क्योंकि यह सीधे तौर पर इस कॉम्पिटिटिव इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मार्केट में प्रॉफिटेबिलिटी को प्रभावित करेगा।
