Indian EV Industry: चीन के सख्त नियमों से EV सेक्टर पर संकट, नए Localization नियमों से बढ़ी कंपनियों की मुश्किल

AUTO
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
Indian EV Industry: चीन के सख्त नियमों से EV सेक्टर पर संकट, नए Localization नियमों से बढ़ी कंपनियों की मुश्किल

भारत का इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर इस समय दोहरी मार झेल रहा है। चीन से आने वाले रेयर-अर्थ मैग्नेट पर **85%** निर्भरता और बढ़ती लागत के बीच, **1 सितंबर, 2026** से लागू हुए नए PM E-DRIVE लोकलाइजेशन नियमों ने मैन्युफैक्चरर्स के लिए चुनौतियां बढ़ा दी हैं, जिसका सीधा असर शॉर्ट-टर्म प्रोडक्शन और मुनाफे पर पड़ सकता है।

भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) का ट्रांजिशन अब एक कठिन दौर से गुजर रहा है। सेक्टर के सामने कच्चे माल (Raw Materials) की भारी किल्लत और सरकार के सख्त घरेलू उत्पादन नियमों का दोहरा दबाव है।

चीन पर निर्भरता और सप्लाई चैन का रिस्क

मौजूदा संकट की जड़ चीन पर हमारी अत्यधिक निर्भरता है। भारत अपनी जरूरत के 85% रेयर-अर्थ मैग्नेट चीन से मंगाता है, जबकि दुनिया की कुल प्रोसेसिंग क्षमता का 90% हिस्सा चीन के पास ही है। साल 2025 में जब चीन ने एक्सपोर्ट लाइसेंसिंग को सख्त किया था, तो मैग्नेट के निर्यात में 74% की भारी गिरावट आई थी, जिससे प्रोडक्शन लाइन थम गई थी। भले ही सप्लाई अब सामान्य है, लेकिन चीन के नीतिगत फैसलों का डर निवेशकों के मन में बना हुआ है।

लागत में बेतहाशा बढ़ोतरी

बैटरी बनाने के लिए जरूरी कच्चे माल जैसे ग्रेफाइट, गैलियम, जर्मेनियम और एंटीमनी के एक्सपोर्ट पर सख्त नियंत्रण है। 2025 में गैलियम की कीमतें 2.5 गुना तक बढ़ गई थीं। ऐसे में कंपनियों के लिए प्रॉफिट मार्जिन बचाना मुश्किल हो गया है, क्योंकि भारत का मार्केट काफी प्राइस-सेंसिटिव है और कंपनियां लागत का बोझ ग्राहकों पर आसानी से नहीं डाल सकतीं।

PM E-DRIVE का दबाव

1 सितंबर, 2026 से लागू हुए PM E-DRIVE स्कीम के नए लोकलाइजेशन नियमों ने कंपनियों की चिंता और बढ़ा दी है। इन नियमों के तहत अब ट्रैक्शन मोटर के पार्ट्स को भारत में ही असेंबल करना अनिवार्य है। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि जब तक घरेलू स्तर पर सप्लाई चैन मजबूत नहीं होती, इन डेडलाइन्स को पूरा करना कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती होगा।

इन्वेस्टर्स के लिए यह एक संकेत है कि EV का ग्रोथ सफर सीधा नहीं होगा। शॉर्ट-टर्म में सप्लाई चैन रिस्क और मार्जिन पर दबाव को मैनेज करना ही कंपनियों की असली परीक्षा होगी। आने वाले समय में कंपनी की कमेंट्री और लोकलाइजेशन की प्रगति पर नजर रखना जरूरी है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.