पेट्रोल-डीजल की महंगाई ने बदली EV की तस्वीर
महंगाई की मार झेल रहे ग्राहकों के लिए इलेक्ट्रिक वाहन (EV) अब पहली पसंद बनते जा रहे हैं। लगातार बढ़ते पेट्रोल-डीजल के दामों के चलते लोग अब सस्ते और बेहतर विकल्प तलाश रहे हैं, जिसका सीधा फायदा इलेक्ट्रिक 2-पहिया और 3-पहिया वाहनों को मिल रहा है।
इलेक्ट्रिक 2-व्हीलर ने छुआ रिकॉर्ड स्तर
ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2026 में इलेक्ट्रिक 2-व्हीलर ने 9.79% का रिकॉर्ड मार्केट शेयर हासिल किया। यह पिछले महीनों और पिछले साल की तुलना में एक बड़ी छलांग है। फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) में इलेक्ट्रिक 2-व्हीलर की रिटेल बिक्री 21.81% बढ़कर 14,01,818 यूनिट्स तक पहुंच गई।
इस सेगमेंट में FY26 के लिए TVS Motor Company सबसे आगे रही, जिसने 3,41,513 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की। Bajaj Auto 2,89,349 यूनिट्स के साथ दूसरे नंबर पर रही, जबकि Ather Energy ने 2,39,178 यूनिट्स बेचीं। वहीं, Ola Electric की बिक्री में 52.28% की भारी गिरावट दर्ज की गई।
3-पहिया सेगमेंट में EV का दबदबा
3-पहिया सेगमेंट में तो इलेक्ट्रिक गाड़ियों का जलवा और भी ज्यादा है। FY26 में इलेक्ट्रिक 3-व्हीलर की रिटेल बिक्री 18.87% बढ़कर 8,30,819 यूनिट्स रही। अकेले मार्च 2026 में, इलेक्ट्रिक गाड़ियों का मार्केट शेयर 3-व्हीलर सेगमेंट में 57.89% पर पहुंच गया, जिसने सीएनजी, डीजल और पेट्रोल गाड़ियों को काफी पीछे छोड़ दिया है। इस सेगमेंट में Mahindra Group 1,01,873 यूनिट्स के साथ टॉप पर रहा, इसके बाद Bajaj Auto 89,604 यूनिट्स के साथ दूसरे स्थान पर रही। TVS Motor Company ने तो 1500% से भी ज्यादा की जबरदस्त ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ दर्ज की।
EV की कम रनिंग कॉस्ट है मुख्य वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि EV के चलने का खर्च (running cost) काफी कम होना इसकी मुख्य वजह है। अनुमान है कि पेट्रोल-डीजल गाड़ियों की तुलना में EV को चलाने में 70-80% तक की बचत होती है। बैटरी स्वैपिंग तकनीक (battery swapping technology) भी इसे और किफायती और सुविधाजनक बना रही है। साथ ही, PM E-DRIVE जैसी सरकारी नीतियां और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार भी इस सेक्टर को बढ़ावा दे रहा है।
हालांकि, कर्नाटक जैसे राज्यों में EV टैक्स छूट का खत्म होना जैसे कुछ राज्य-स्तरीय नीतिगत बदलाव खरीद निर्णयों को प्रभावित कर रहे हैं, लेकिन कुल मिलाकर यह ट्रेंड काफी मजबूत बना हुआ है। विश्लेषकों को उम्मीद है कि आने वाले 6-12 महीनों में बेहतर इकोनॉमिक्स और सरकारी समर्थन के चलते EV अपनाने की रफ्तार जारी रहेगी।