Vahan Portal के आंकड़ों के अनुसार, FY26 में भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की कुल 24.3 लाख यूनिट्स का रजिस्ट्रेशन हुआ, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर के मुकाबले 23% की ज़बरदस्त बढ़ोतरी है। पहली बार EV रजिस्ट्रेशन 20 लाख यूनिट्स के पार पहुंचा है। इस शानदार ग्रोथ की वजह सरकारी सहायता, नए मॉडलों की लगातार लॉन्चिंग और एनर्जी सिक्योरिटी पर बढ़ता फोकस रहा है। Tata Motors Passenger Vehicles ने FY26 में 92,000 से ज़्यादा EV बेचीं, जो पिछले साल से 43% अधिक हैं।
इलेक्ट्रिक कारों में तेज़ उछाल, टू-व्हीलर अभी भी आगे
वाहन सेगमेंट में ग्रोथ अलग-अलग रही है। इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री 80% से ज़्यादा बढ़कर FY26 में 1.97 लाख यूनिट्स तक पहुंच गई, हालांकि यह एक छोटी बेस से शुरू हुई थी। Tata Motors इस सेगमेंट में 77,658 यूनिट्स की बिक्री के साथ सबसे आगे रही। इसके बाद JSW MG Motor India (52,408 यूनिट्स) और Mahindra & Mahindra (42,006 यूनिट्स) का नंबर रहा। मार्च 2026 तक, Mahindra & Mahindra ने JSW MG Motor को पीछे छोड़ते हुए मासिक बिक्री में दूसरी पोजीशन हासिल कर ली है, और FY25 के 7.8% से बढ़कर FY26 में इसका मार्केट शेयर 21.2% हो गया। इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स वॉल्यूम के मामले में सबसे आगे रहे, जिनकी बिक्री FY26 में 13.9 लाख यूनिट्स रही। TVS Motor 340,758 यूनिट्स के साथ टॉप पर रही, जो पिछले साल से 43% ज़्यादा है और उसने 24.3% मार्केट शेयर हासिल किया। Bajaj Auto 288,866 यूनिट्स के साथ दूसरे स्थान पर रही, जिसका शेयर 20.6% रहा। इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर्स में भी 18% की बढ़ोतरी देखी गई और यह 8.27 लाख यूनिट्स तक पहुंच गए। हालांकि, Ola Electric जैसी नई कंपनियों की तुलना में TVS Motor और Bajaj Auto जैसी स्थापित कंपनियों की पकड़ मजबूत हुई है।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्विस गैप बनी हुई हैं बड़ी चुनौती
बिक्री में शानदार ग्रोथ के बावजूद, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी EV को व्यापक रूप से अपनाने में एक बड़ी बाधा बनी हुई है, खासकर इलेक्ट्रिक कारों के लिए। शहरों में चार्जिंग स्टेशनों के लिए जगह की कमी और ज़्यादा सेटअप लागत प्रमुख चिंताएं हैं। एक 60-kW DC चार्जर को इंस्टॉल करने में ₹5 लाख से ₹7 लाख तक का खर्च आ सकता है। साथ ही, मौजूदा चार्जिंग स्टेशनों की क्वालिटी और विश्वसनीयता असंगत है। सर्विस और रिपेयर नेटवर्क भी पीछे है, क्योंकि 85% पारंपरिक मैकेनिकों के पास EV कंपोनेंट्स के लिए विशेष स्किल्स नहीं हैं।
वैल्यूएशन और मार्जिन पर निवेशकों की चिंता
इम्प्रैसिव सेल्स के बावजूद, निवेशकों का भरोसा पूरी तरह से नहीं बढ़ा है। Tata Motors का स्टॉक मार्च 2026 में ₹300-₹400 के बीच ट्रेड कर रहा था, भले ही रिकॉर्ड बिक्री और मजबूत EV ग्रोथ दर्ज की गई हो। यह निवेशकों की लाभप्रदता और प्रतिस्पर्धा को लेकर चिंताओं को दर्शाता है। कंपनी का P/E रेश्यो लगभग 20.6 है। Mahindra & Mahindra का P/E रेश्यो 20.1 से 24.42 के बीच रहा। ये वैल्यूएशन ऐसे समय में आए हैं जब इनपुट लागतें और सप्लाई चेन की समस्याएं बढ़ रही हैं, जिससे प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है।
भविष्य की ग्रोथ पॉलिसी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर
आगे चलकर, ICRA के अनुसार, FY27 में भारतीय ऑटो सेक्टर में 3-6% की मामूली ग्रोथ की उम्मीद है। EV सेक्टर की ग्रोथ अभी भी FAME स्कीम जैसी सरकारी इंसेंटिव्स पर बहुत ज़्यादा निर्भर करती है। हालांकि, खरीदारों के लिए कम जीएसटी (5% बनाम रेगुलर कारों के लिए 28%) और इंटरेस्ट सब्सिडी जैसे इंसेंटिव्स महत्वपूर्ण बने रहेंगे।
भारत के EV मार्केट ग्रोथ के लिए मुख्य जोखिम
भारत के EV मार्केट की तेज़ ग्रोथ के साथ कई बड़े जोखिम जुड़े हैं। इनमें अपर्याप्त चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, सबसिडी पर निर्भरता, तीव्र प्रतिस्पर्धा और कुशल टेक्नीशियन की कमी शामिल हैं।