अप्रैल 2026 में EV की बिक्री ने तोड़े रिकॉर्ड
भारत के ऑटो मार्केट में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को अपनाने की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है। प्रोडक्ट की बेहतर उपलब्धता, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार और ग्राहकों का बढ़ता भरोसा इस शानदार परफॉर्मेंस के मुख्य कारण हैं। EVs अब कुल पैसेंजर व्हीकल बिक्री का एक बड़ा हिस्सा बन रही हैं, जो क्लीनर ट्रांसपोर्टेशन की ओर एक बड़ा बदलाव दिखाता है।
अप्रैल 2026 इलेक्ट्रिक वाहन सेक्टर के लिए एक अहम महीना साबित हुआ। पैसेंजर व्हीकल (PV) की बिक्री में साल-दर-साल 75.14% का इजाफा हुआ और यह 23,506 यूनिट्स पर पहुंच गई। वहीं, इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स (E2W) की बिक्री में 60.73% की जोरदार तेजी देखी गई और यह 1,48,740 यूनिट्स पर जा पहुंची। इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर (E3W) सेगमेंट ने भी अपनी मजबूत रफ्तार जारी रखी, जिसकी कुल बिक्री में EV पेनिट्रेशन 60.38% रहा। यह ग्रोथ इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को व्यापक रूप से अपनाने का संकेत देती है, जिसे बेहतर प्रोडक्ट अवेलेबिलिटी, बढ़ते चार्जिंग नेटवर्क और सरकारी योजनाओं जैसे PM E-DRIVE से भी मदद मिल रही है। कुल मिलाकर, अप्रैल में भारतीय ऑटो मार्केट में कुल PV होलसेल वॉल्यूम में करीब 20% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
प्रमुख खिलाड़ी और मार्केट शेयर
Tata Motors Passenger Vehicles (TMPV) ने EV PV सेगमेंट में अपनी लीडरशिप बनाए रखी। कंपनी ने 8,543 यूनिट्स बेचीं, जो पिछले साल के मुकाबले 77.17% ज्यादा हैं और लगभग 36% मार्केट शेयर का प्रतिनिधित्व करती हैं। Mahindra & Mahindra (M&M) भी एक मजबूत परफॉर्मर रहा, जिसने 5,413 यूनिट्स की बिक्री की, जो पिछले साल से 63.98% अधिक है। M&M ने लगातार दूसरे महीने JSW MG Motor India को पीछे छोड़ा और फाइनेंशियल ईयर 26 में EV रेवेन्यू लीडर बन गया, भले ही यूनिट बिक्री थोड़ी कम रही हो। JSW MG Motor India ने 5,006 यूनिट्स बेचीं। E2W मार्केट में, TVS Motor Company और Bajaj Auto ने Ather Energy जैसे प्लेयर्स के साथ अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी। Ola Electric भी हालिया गिरावट के बाद वापसी करता दिख रहा है। मार्केट में नए मॉडल्स जैसे Simple Ultra (400km रेंज) और Yamaha का EC-06 आने से प्रोडक्ट इनोवेशन बढ़ रहा है। भारत का चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर 2026 की शुरुआत तक 27,000 पब्लिक स्टेशनों को पार कर गया है, जिनमें ज्यादातर टू/थ्री-व्हीलर्स के लिए AC चार्जर्स हैं, और अब कारों के लिए DC फास्ट चार्जर्स की संख्या भी बढ़ रही है।
चुनौतियां अभी भी बरकरार
लगातार मजबूत ग्रोथ के बावजूद, EV सेक्टर के सामने अभी भी महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं। भारत के पैसेंजर व्हीकल मार्केट में EV पेनिट्रेशन अभी भी करीब 5.8% है, जो चीन के लगभग 40% से काफी कम है। सीमित और असंगत चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर खरीदारों के लिए रेंज एंग्जाइटी (चिंता) पैदा करता है। साथ ही, EVs की कीमत सामान्य पेट्रोल कारों की तुलना में लगभग 15-20% अधिक है, जो एक बड़ा प्राइस गैप है। भू-राजनीतिक तनावों से उत्पन्न ग्लोबल सप्लाई चेन के जोखिमों का कीमतों और ग्राहक मांग पर असर पड़ सकता है। भारत को 2030 के विद्युतीकरण लक्ष्यों को पूरा करने के लिए ₹10 लाख करोड़ से अधिक के अनुमानित फंडिंग गैप का सामना करना पड़ रहा है, जिसके लिए उत्पादन और इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश की आवश्यकता होगी। इंपोर्टेड बैटरी कंपोनेंट्स पर निर्भरता भी एक कमजोरी है।
निरंतर ग्रोथ का अनुमान
विशेषज्ञों का अनुमान है कि भारत के EV मार्केट में मजबूत ग्रोथ जारी रहेगी, और फाइनेंशियल ईयर 26 में कुल बिक्री 2.5 मिलियन यूनिट्स से अधिक होने की उम्मीद है। सरकारी समर्थन और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार से इस ट्रेंड को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, तेज एडॉप्शन इंफ्रास्ट्रक्चर गैप को ठीक करने, पेट्रोल वाहनों के साथ लागत के अंतर को कम करने और लगातार सरकारी नीतियों पर निर्भर करेगा। 2030 के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए निरंतर निवेश और समन्वित नीति की आवश्यकता होगी। यह मार्केट अब शुरुआती अपनाने वालों से मुख्यधारा के उपभोक्ताओं की ओर बढ़ रहा है, जिसके लिए सभी वाहन प्रकारों और क्षेत्रों में किफायती, स्केलेबल समाधानों की जरूरत है।
